देहरादून28मार्च 2025(आरएनएस ): उत्तराखंड खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे बड़ा राजस्व संग्रह कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग ने अब तक 1025 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर लिया है, जो राज्य गठन के बाद पहली बार हुआ है। यह आंकड़ा वित्त विभाग द्वारा निर्धारित 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य से कहीं अधिक है, जिससे सरकार को बड़ी आर्थिक मजबूती मिली है।
खनन विभाग ने पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत 159 खनन पट्टों और 2 सिलिका सैंड पट्टों की नीलामी कर यह उपलब्धि हासिल की है। इसके अलावा, अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिसके चलते इस क्षेत्र में बड़े सुधार देखे जा रहे हैं।
पिछले वर्षों में राजस्व वृद्धि का तुलनात्मक आंकड़ा
वर्ष 2010-11 से लेकर अब तक खनन विभाग के राजस्व में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2010-11 में जहां 90.24 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं 2011-12 में यह बढ़कर 112.33 करोड़ रुपये हो गया। 2012-13 में 109.90 करोड़ रुपये, 2013-14 में 248 करोड़ रुपये, और 2014-15 में 224.27 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।
2015-16 में यह राशि 317.67 करोड़ रुपये हो गई, जो 2016-17 में बढ़कर 335.27 करोड़ रुपये हो गई। इसके बाद 2017-18 में 440.13 करोड़ रुपये और 2018-19 में 414.59 करोड़ रुपये का राजस्व आया।
2019-20 में यह घटकर 396.77 करोड़ रुपये रहा, लेकिन 2020-21 में फिर से उछाल आया और 506.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। 2021-22 में यह 275.01 करोड़ रुपये, 2022-23 में 472.25 करोड़ रुपये, और 2023-24 में 645.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
अब, वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे अधिक 1025 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है।
अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, 5 वर्षों में 74.22 करोड़ की जब्ती
खनन विभाग अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। बीते पांच वर्षों में 74.22 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ 11,508 अवैध खनन मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है।
वर्ष 2020-21 में 2752 मामलों में कार्रवाई करते हुए 18.05 करोड़ रुपये की जब्ती की गई थी। 2021-22 में 1818 मामलों में 13.17 करोड़ रुपये, 2022-23 में 2250 मामलों में 17.04 करोड़ रुपये, 2023-24 में 2512 मामलों में 19.17 करोड़ रुपये, और 2024-25 में 2176 मामलों में 74.22 करोड़ रुपये की जब्ती की गई।
खनन विभाग द्वारा इन सख्त कदमों से अवैध खनन पर काफी हद तक लगाम लगाने में सफलता मिली है।
अवैध खनन पर निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। इसके तहत चार माइनिंग चेक पोस्टों पर ऑटोमैटिक सर्विलांस सिस्टम लगाया जा रहा है। इन पोस्टों में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध होंगी:
- नाइट विजन कैमरे से अवैध खनन गतिविधियों पर 24×7 निगरानी।
- आरएफआईडी ट्रैकिंग सिस्टम से खनन लदे वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण।
- अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और जब्ती की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
विशेष टीमें और प्रवर्तन दल कर रहे हैं सख्त कार्रवाई
खनन विभाग ने अवैध खनन पर रोकथाम के लिए हर जिले में “जिला अवैध खनन बल” (District Anti Illegal Mining Force) का गठन किया है। इसमें खनन, वन, पुलिस और पर्यावरण विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्राम प्रधान भी शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा, राज्य स्तर पर “प्रवर्तन दल” (Enforcement Cell) गठित किया गया है, जो अचानक छापेमारी कर अवैध खनन, अवैध परिवहन और भंडारण पर कार्रवाई करता है।
जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान
राज्य सरकार ने जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए Complaint Redressal Portal (dgmapp.uk.gov.in) तैयार किया है, जहां लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
इसके अलावा, वर्ष 2019 से सीएम हेल्पलाइन 1905 और “Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System” (CPGRAMS) लागू किया गया है, जिससे अवैध खनन से जुड़ी जनता की शिकायतों का समाधान किया जा रहा है।
पर्यावरण संतुलन के साथ खनन गतिविधियों को बढ़ावा
खनन विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि खनन गतिविधियां सुनियोजित तरीके से संचालित हों, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। इसके तहत:
- खनन स्थलों पर ग्रीन बेल्ट विकसित करने और पुनर्वास योजना लागू की जा रही है।
- ट्रकों और डंपरों को दिन के समय शहरी क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे यातायात व्यवस्था बाधित न हो।
- रात के समय खनिज सामग्री के परिवहन की निगरानी के लिए सीसीटीवी और स्कैनिंग प्लांट्स लगाए जा रहे हैं।
खनन विभाग की यह उपलब्धि राजस्व वृद्धि और अवैध खनन पर नियंत्रण का एक बेहतरीन उदाहरण है। पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, अत्याधुनिक निगरानी तंत्र, और सख्त कानूनी कार्रवाई से राज्य सरकार को न केवल इतिहास में सबसे अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।
सरकार का अगला लक्ष्य खनन से होने वाली आमदनी को 1100 करोड़ रुपये के पार ले जाना और खनन गतिविधियों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और पारदर्शी बनाना है।

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