वाशिंगटन ,30 अगस्त । रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका में भारत पर हो रहे हमलों के बीच एक प्रभावशाली अमेरिकी-यहूदी समर्थक समूह भारत के पक्ष में खड़ा हो गया है। समूह ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों द्वारा की जा रही आलोचना की निंदा करते हुए साफ कहा है कि यूक्रेन संकट के लिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अमेरिका के सबसे पुराने यहूदी समर्थक समूहों में से एक, अमेरिकन ज्यूइश कमेटी (्रछ्वष्ट) ने शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों के बयानों पर हैरानी जताते हुए अमेरिका-भारत संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का आह्वान किया।
यह मामला तब गरमाया जब व्हाइट हाउस के पूर्व व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन संकट को मोदी का युद्ध करार दे दिया। ट्रंप प्रशासन से जुड़े अधिकारी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि भारत द्वारा खरीदे जा रहे रूसी तेल से मिले पैसों का इस्तेमाल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए कर रहे हैं।
्रछ्वष्ट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों की ओर से भारत पर किए गए जुबानी हमलों से बहुत हैरान और चिंतित है। समूह ने नवारो की टिप्पणी को एक अपमानजनक आरोप बताया।
संगठन ने अपनी पोस्ट में लिखा, हमें ऊर्जा के लिए जरूरतमंद भारत की रूसी तेल पर निर्भरता पर खेद है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है। यह एक सहयोगी लोकतांत्रिक देश और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
पोस्ट के अंत में समूह ने रिश्तों में आई तल्खी को कम करने पर जोर देते हुए कहा, यह इन महत्वपूर्ण संबंधों को फिर से स्थापित करने का समय है। इस बयान को भारत के खिलाफ बन रहे माहौल में एक बड़े कूटनीतिक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
यूक्रेन युद्ध के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं, यूएस में ही होने लगी ट्रंप के अधिकारियों की आलोचना
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