देहरादून। देहरादून के ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में एक सप्ताह तक चलने वाला राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस धातुओं के क्षरण (corrosion) के उन्नत विश्लेषण और इसके समाधान पर केंद्रित है। पहले दिन विशेषज्ञों ने धातु क्षरण की चुनौतियों, आधुनिक विश्लेषण तकनीकों और व्यावहारिक उपायों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नरपिंदर सिंह ने धातुओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धातु न केवल औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों की रीढ़ है, बल्कि चिकित्सा उपकरणों जैसे जीवन रक्षक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने धातु क्षरण को एक वैश्विक चुनौती बताते हुए इसके पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी प्रभावों पर जोर दिया। प्रो. सिंह ने आधुनिक तकनीकों और रियल-टाइम निगरानी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और खाद्य उद्योग से जुड़ी समस्याएं इस क्षेत्र में नई जटिलताएं पैदा कर रही हैं।
यह सप्ताह भर का एफडीपी ग्राफिक एरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग और भौतिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्रों के माध्यम से देशभर के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। इन सत्रों में धातु क्षरण से जुड़े नवीनतम शोध और तकनीकी समाधानों पर विचार-विमर्श होगा।
कार्यक्रम का संयोजन डा. गोपाल शर्मा और डा. मानवेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डा. कपिल शर्मा, भौतिकी विभाग के प्रमुख डा. फतेह गिल, डा. देशबंधु सिंह, डा. किरण शर्मा सहित कई शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम धातु क्षरण के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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