निमिषा प्रिया केस : सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. के.ए. पॉल की याचिका पर नोटिस जारी किया, मीडिया पर अस्थायी रोक की मांग

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आरएनएस)।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यमन में मृत्युदंड का सामना कर रही नर्स निमिषा प्रिया के मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. के.ए. पॉल ने व्यक्तिगत रूप से दायर की, जिसमें मीडिया कवरेज पर कुछ दिनों के लिए रोक लगाने का आग्रह किया गया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख सोमवार, 25 अगस्त तय की। डॉ. पॉल ने अदालत को बताया कि मीडिया में लगातार हो रही चर्चाएं और दावे भारत और यमन के बीच चल रही संवेदनशील कूटनीतिक व धार्मिक बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं केवल तीन दिन या एक सप्ताह तक की रोक चाहता हूँ, जब तक निमिषा रिहा नहीं हो जाती। सरकार अपनी ओर से बोले, लेकिन वे लोग नहीं जो बार-बार झूठे दावे कर रहे हैं।” याचिका में तर्क दिया गया है कि भारतीय अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं और धार्मिक हस्तियों के प्रयास यमन में कानूनी रास्तों से समाधान निकालने पर केंद्रित हैं, ऐसे में अनियंत्रित मीडिया कवरेज इन पहलों को नुकसान पहुँचा सकती है। अदालत की कार्यवाही के बाद डॉ. पॉल ने टिप्पणी की कि यह कदम न्याय और राष्ट्रीय हित दोनों की रक्षा की दिशा में अहम है।डॉ. पॉल इससे पहले बेटिंग एप्लिकेशनों पर रोक लगाने की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर चुके हैं। उस पर हुई सुनवाई के बाद केंद्र सरकार ने बिल लाकर संसद से सर्वसम्मति से प्रतिबंध संबंधी कानून पारित किया। इस पर उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और संसद के सभी सदस्यों का आभारी हूँ। यह कानून लाखों युवाओं को बेटिंग के खतरों से बचाएगा।
उन्होंने फिल्मी हस्तियों से भी अपील की कि वे बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के प्रचार से दूरी बनाएँ और समाज के लिए हानिकारक गतिविधियों को प्रोत्साहन न दें।

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