नर्सिंग अफसरों का धरना 99वें दिन में, सरकार पर भड़के युवा- ‘बजट सत्र में भी नहीं सुनी गुहार’

देहरादून: प्रदेश में वर्षवार भर्ती प्रणाली की बहाली की मांग को लेकर नर्सिंग अधिकारियों का आंदोलन गुरुवार को 99वें दिन में प्रवेश कर गया। सवा तीन महीने से शांतिपूर्ण तरीके से जारी इस धरने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न किए जाने से हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र से अभ्यर्थियों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सदन में उनकी मांग को लेकर चुप्पी देखते हुए अब आंदोलनकारियों ने संघर्ष को और तेज करने का एलान कर दिया है।

धरना स्थल पर जुटे नर्सिंग अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रदेश में कई बैच लंबे समय से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वर्षवार भर्ती प्रणाली लागू न होने के कारण हजारों योग्य युवा बेरोजगार हैं, जबकि अस्पतालों में नर्सिंग अधिकारियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि सभी लंबित बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली के तहत समायोजित किया जाए और रिक्त पदों को इसी क्रम में भरा जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

बजट सत्र से थी उम्मीद, निराशा हाथ लगी

गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान अभ्यर्थियों को काफी उम्मीद थी कि उनकी मांग पर कोई ठोस चर्चा होगी या कोई घोषणा होगी। लेकिन बजट सत्र में उनकी मांग को लेकर कोई मुद्दा नहीं उठाया गया, जिससे आंदोलनकारियों में गहरा आक्रोश है। एक अभ्यर्थी ने कहा, “99 दिन हो गए, हम धूप में बैठे हैं, लेकिन सरकार को हमारा दर्द नहीं दिखता। बजट सत्र में भी हमारी गुहार नहीं सुनी गई। अब हमें आंदोलन को और उग्र बनाना होगा।”

बजट सत्र में मांग न उठाए जाने के कारण नर्सिंग अभ्यर्थियों ने अब आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जाएगा। धरना स्थल पर मौजूद नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, सरिता जोशी, प्रवेश रावत, स्तुति सती, भास्कर और भारती ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदेश भर से आए इन नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सिर्फ अपनी नौकरी की मांग नहीं कर रहे, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए योगदान देना चाहते हैं। अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी से मरीजों को परेशानी हो रही है, ऐसे में प्रशिक्षित युवाओं को मौका देना सरकार की जिम्मेदारी बनती है।

धरना स्थल पर भारी संख्या में एकत्र नर्सिंग अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो वे सड़क से लेकर सदन तक अपना आंदोलन तेज करेंगे और विधानसभा सत्र के दौरान गैरसैंण का घेराव करने सहित कई उग्र कदम उठा सकते हैं।

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