उत्तरकाशी(आरएनएस)। बैसाखी पर्व पर गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब देखने को मिला। दूर दराज क्षेत्र के ग्रामीण ब्रह्ममुहूर्त में देव डोलियों संग गंगा स्नान को पहुंचे और गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की और मंदिरों जलाभिषेक भी किया। सोमवार को बैसाखी पर्व पर उत्तरकाशी के पौराणिक मणिकर्णिका, जडभरत, गंगोरी, लक्ष्येश्वर, देवीधार, हीना आदि स्नान घाटों पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु एवं देव डोलियां गंगा स्नान के लिए पहुंचने लगी। जहां पर सभी ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और गंगा आरती के साथ अपने-अपने अराध्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की। स्नान पर्व पर मुसड़गांव के नागराजा देवता, पंचाणा गांव के चंदणनाग, नागणी माता, खंडद्वारी, नाग देवता, रेणुका देवी, भैरव देवता, राजराजेश्वरी की देव डोलियां, ढोल, निशान आदि गंगा स्नान को पहुंची और गंगा में स्नान करने के बाद अपने गंतव्य को रवाना हुई। इस दौरान नगर के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, हनुमान, कंडार देवता सहित नगर क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में भी जलाभिषेक व दर्शनी के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैसाखी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। ग्रामीणों ने पंचायत के चौक और मंदिरों में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की और श्रीफल, पुष्प, फल, दूध, दही, नैवैद्य के साथ चावल से बनी पापड़ी और पूरी का भोग लगा कर कुशलता की कामना की। इस मौके पर ग्रामीण पूर्णानंद, राजेन्द्र गंगाड़ी, महेश चंद्र, जितेन्द्र, लक्ष्मी प्रसाद, राम संजीवन, हरि शंकर, अरुण प्रकाश, काशीराम, सूर्य प्रकाश, सुमन, अंकित नौटियाल आदि ग्रामीण मौजूद रहे।

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