देहरादून में एक दिन, दो मंच: राहुल गांधी का छात्र संवाद या जैस्मीन सैंडलस का शो, युवाओं ने किसे दी ज्यादा तवज्जो ?

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी शुक्रवार को युवा राजनीति और जनसंपर्क की दो अलग-अलग शैलियों की साक्षी बनी। शहर में एक ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी ओर निकटवर्ती क्षेत्र के परेड ग्राउंड में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायिका जैस्मीन सैंडलस की प्रस्तुति ने भी युवाओं का ध्यान आकर्षित किया।

राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों को उठाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान कई विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव और समस्याएं साझा कीं।

इस बीच राहुल गांधी का एक मानवीय क्षण भी चर्चा में रहा, जब उन्होंने कार्यक्रम के दौरान एक छोटी बच्ची से बातचीत की और उसके भविष्य के सपनों के बारे में पूछते हुए उसे प्रोत्साहित किया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया।

इसी दौरान शहर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पंजाबी गायिका जैस्मीन सैंडलस ने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर युवाओं का मनोरंजन किया। कार्यक्रम में भी अच्छी संख्या में लोग पहुंचे और देर तक संगीत का आनंद लेते रहे। राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं भी होती रहीं, हालांकि इसे लेकर किसी आधिकारिक पक्ष की ओर से प्रत्यक्ष राजनीतिक उद्देश्य की पुष्टि नहीं की गई।

दिनभर दोनों आयोजनों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होते रहे। जहां एक वर्ग ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताया, वहीं दूसरे वर्ग ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को सामान्य मनोरंजन का आयोजन बताया। दोनों पक्षों के समर्थकों ने अपने-अपने कार्यक्रमों को सफल बताते हुए अलग-अलग दावे किए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता जैसे विषय आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि शुक्रवार को देहरादून में युवाओं को केंद्र में रखकर हुए दोनों आयोजनों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया। किस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक लाभ मिलेगा, इसका उत्तर आने वाले समय और अंततः चुनावी परिणाम ही तय करेंगे।

Static 1 Static 1
ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments