देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी ‘ऑपरेशन कालनेमि’ अभियान के तहत देहरादून पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दून पुलिस ने फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाकर अवैध रूप से भारत में रह रही दो बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार/हिरासत में लिया है। इनमें से एक महिला ने न केवल हिंदू महिला के नाम पर फर्जी पहचान बनाई, बल्कि एक स्थानीय हिंदू युवक से विवाह भी कर लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर, कोतवाली पटेलनगर पुलिस ने देहराखास क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर सघन चेकिंग की। पुलिस ने पहले देहराखास, पटेलनगर क्षेत्र से एक महिला भूमि शर्मा को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपना असली नाम बबली खातून पत्नी मो. मुनजु (उम्र 28 वर्ष) बताया, जो बांग्लादेश के जिला गायबन्दा की निवासी है।
- फर्जी पहचान: बबली खातून ने पुलिस को बताया कि वह कोविड महामारी के दौरान अवैध रूप से बॉर्डर क्रॉस कर भारत आई थी।
- धोखाधड़ी से विवाह: वर्ष 2022 में, उसने देहरादून निवासी एक हिंदू युवक से अपना नाम और पता बदलकर विवाह कर लिया।
- फर्जी दस्तावेज: उसने अपने अन्य परिचितों की मदद से भूमि शर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज बनवा लिए थे। पुलिस ने उसके कब्जे से भूमि शर्मा के नाम के ये सभी फर्जी दस्तावेज और उसकी असली बांग्लादेशी आईडी (बबली बेगम के नाम से) बरामद की।
फर्जी दस्तावेज बनाकर अवैध रूप से भारत में रहने और धोखाधड़ी करने के आरोप में बबली खातून के खिलाफ कोतवाली पटेलनगर में मुकदमा संख्या 633/2025 (धारा 420/467/468/471 भादवि, 3 पासपोर्ट अधिनियम और 14 विदेशी अधिनियम) के तहत अभियोग पंजीकृत कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों पर भी पुलिस की पैनी नजर है और उनके खिलाफ भी सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इसी अभियान के तहत, पुलिस ने कारगी रोड, कालिंदा विहार, पटेलनगर से एक अन्य संदिग्ध महिला बॉबी खातून (उम्र 41 वर्ष) को भी हिरासत में लिया। पूछताछ में पता चला कि वह भी वर्ष 2023 में चोरी छिपे बांग्लादेश से भारत आई थी और देहरादून में मजदूरी करके जीवन यापन कर रही थी। उसके पास से बांग्लादेशी पहचान पत्र की छायाप्रति मिली है। बॉबी खातून को भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार जल्द ही बांग्लादेश डिपोर्ट किया जाएगा।
दून पुलिस ने बताया कि ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत अब तक जनपद में अवैध रूप से रह रहे 17 बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें से 8 नागरिकों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है, जबकि 9 नागरिकों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया जा चुका है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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