देहरादून / ऋषिकेश। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों की बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को परखने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से संचालित राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम ‘कायाकल्प’ के तहत एक उच्च-स्तरीय दल ने संस्थान का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण प्रणाली और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण दल में शामिल विशेषज्ञों ने अस्पताल के संवेदनशील और महत्वपूर्ण वार्डों का दौरा किया। इनमें आपातकालीन सेवा, ट्रॉमा सेंटर, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), संचालन कक्ष (ओटी) और विभिन्न रोगी वार्ड शामिल रहे। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि संक्रमण की रोकथाम के लिए बनाए गए सभी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। इस कड़ी में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) के उपयोग से लेकर हाथ धोने की प्रक्रिया तक, हर बिंदु को बारीकी से परखा गया। इसके अतिरिक्त, प्रयोगशाला, औषधालय, रसोई और कपड़े धोने की इकाई (लॉन्ड्री) का भी निरीक्षण किया गया ताकि भोजन और वस्त्रों से होने वाले किसी भी संक्रमण के खतरे को रोका जा सके।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह के नेतृत्व में पूरे अस्पताल प्रशासन ने निरीक्षण दल का स्वागत किया। प्रो. सिंह ने अधिकारियों को बताया कि किस प्रकार एम्स ने ‘कायाकल्प’ के तहत निर्धारित मानकों को आत्मसात किया है और मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान में चल रहे विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

इस दौरान, अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से भी फीडबैक लिया गया। टीम ने सीधे संवाद करके जाना कि उन्हें यहां की सेवाएं कैसी लग रही हैं और कहीं कोई कमी तो नहीं है। निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में विशेषज्ञों ने अस्पताल की सराहना करते हुए कुछ सुझाव भी दिए, जिससे सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके। इस मौके पर डॉ. यशवंत सिंह पयाल, डॉ. पूजा भदौरिया, डॉ. श्रीलोय मोहंती और डॉ. अनिता रानी कंसल सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने बताया कि इस तरह के निरीक्षण का मकसद सिर्फ मानकों की जांच करना नहीं, बल्कि अस्पताल को एक बेहतर और सुरक्षित उपचार केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि टीम द्वारा दिए गए सुझावों पर तुरंत अमल किया जाएगा, जिससे मरीजों को और बेहतर वातावरण मिल सके।

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