पेनिसिया कांड: मरीज झुलसे, व्यवस्था बेनकाब -सूर्यकान्त धस्माना

आग सिर्फ अस्पताल में नहीं लगी, व्यवस्था की परतें भी झुलस गईं

पेनिसिया हादसे के बाद कैलाश अस्पताल पहुंचे सूर्यकांत धस्माना, फर्जी व मानकों के खिलाफ चल रहे अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई और बहादुर पुलिसकर्मियों को सम्मान देने की उठाई मांग

देहरादून। हरिद्वार रोड स्थित पेनिसिया अस्पताल में आज सुबह एसी ब्लास्ट के बाद भड़की भीषण आग ने न सिर्फ मरीजों और उनके परिजनों को दहला दिया, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस दर्दनाक हादसे में झुलसे मरीजों और उन्हें बचाने में घायल हुए पुलिसकर्मियों का हालचाल जानने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना कैलाश अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और घटना को सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही और संरक्षण प्राप्त अव्यवस्था का परिणाम बताया।

कैलाश अस्पताल में पहले से मौजूद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत के दौरान सूर्यकांत धस्माना ने पेनिसिया अस्पताल समेत प्रदेशभर में मानकों के खिलाफ चल रहे कथित फर्जी अस्पतालों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस अस्पताल में आज आग लगी, वह केवल एक अस्पताल नहीं बल्कि एक बड़े रैकेट का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें देहरादून के कई डॉक्टर, 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े कुछ संचालक और अस्पताल प्रबंधन तक शामिल हैं। धस्माना ने आरोप लगाया कि ऐसे नेटवर्क को ऊंची पहुंच वाले लोगों का संरक्षण भी प्राप्त है, जिसके कारण लंबे समय से इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने आवश्यक और कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

धस्माना ने अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम जानी और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि घायलों को समुचित उपचार मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने उन पुलिसकर्मियों की भी खुले दिल से सराहना की, जो अपनी जान की परवाह किए बिना आग की लपटों के बीच मरीजों को बचाने में जुटे रहे और स्वयं भी झुलस गए। उन्होंने डीजीपी और राज्य सरकार से मांग की कि इन बहादुर पुलिसकर्मियों को न सिर्फ सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए, बल्कि उन्हें पुरस्कृत भी किया जाए ताकि सेवा और साहस का संदेश पूरे तंत्र तक पहुंचे।

कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ प्रबंधक पवन शर्मा ने सूर्यकांत धस्माना को बताया कि पेनिसिया अस्पताल में आग लगने की सूचना मिलते ही कैलाश अस्पताल की एम्बुलेंस और टीम तुरंत सक्रिय हो गई थी। उन्होंने बताया कि वहां भर्ती सभी मरीजों को बिना देर किए कैलाश अस्पताल शिफ्ट किया गया। शर्मा के अनुसार, एक मरीज को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि बारह मरीज वर्तमान में अस्पताल में भर्ती हैं और उनका उपचार जारी है। इस पर धस्माना ने अस्पताल प्रबंधन से आग्रह किया कि सभी घायलों की पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और जिम्मेदारी के साथ देखभाल की जाए।

यह हादसा एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को सामने लाता है कि जब अस्पताल जैसे भरोसे के स्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है, तो आग सिर्फ इमारतों को नहीं जलाती, वह व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी राख कर देती है। मरीज इलाज के लिए अस्पताल जाते हैं, लेकिन अगर वहीं उनकी जिंदगी जोखिम में पड़ जाए, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, सामाजिक अपराध भी है।

सूर्यकांत धस्माना का यह दौरा केवल संवेदना प्रकट करने भर का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उसने उस बड़े सवाल को केंद्र में ला खड़ा किया है कि आखिर प्रदेश में कितने अस्पताल सुरक्षा मानकों, लाइसेंस, आपात प्रबंधन और नैतिक जिम्मेदारी के बिना चल रहे हैं। यदि इस हादसे के बाद भी शासन-प्रशासन नहीं चेता, तो आने वाले दिनों में ऐसे हादसे और भी बड़े रूप में सामने आ सकते हैं।

स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी निजी अस्पताल में आग जैसी घटना केवल तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं मानी जा सकती। यह अक्सर फायर सेफ्टी ऑडिट, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, स्टाफ ट्रेनिंग और रेगुलेटरी मॉनिटरिंग की सामूहिक विफलता का संकेत होती है।

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पतालों में आग की घटनाएं सबसे अधिक घातक इसलिए होती हैं क्योंकि वहां भर्ती मरीजों में कई ऐसे होते हैं जो स्वयं बाहर नहीं निकल सकते। ऐसे में हर अस्पताल में फंक्शनल फायर सिस्टम, स्पष्ट निकासी योजना, मॉक ड्रिल और प्रशिक्षित स्टाफ होना अनिवार्य है। यदि इनमें कमी पाई जाती है, तो इसे लापरवाही नहीं, गंभीर दंडनीय उल्लंघन माना जाना चाहिए।

पुलिस और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जिन पुलिसकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को बचाया, उनका सम्मान केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए। ऐसे कर्मियों को पुरस्कृत करना प्रशासनिक संस्कृति को मानवीय और प्रेरक बनाता है।

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