अभिलेखों के डिजिटलीकरण और स्मार्ट पुलिसिंग पर दिया जोर; गुणवत्ता से समझौता न करने के सख्त निर्देश
पिथौरागढ़। कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल ने बुधवार को जनपद पिथौरागढ़ का वार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। आईजी ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी कामकाज में किसी भी तरह की शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आईजी ने अपने दौरे की शुरुआत थाना जाजरदेवल के निर्माणाधीन भवन के स्थलीय निरीक्षण से की। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के साथ तकनीकी मापदंडों और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की। आईजी ने निर्देश दिए कि:
- सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
- तकनीकी मानकों और सामग्री की गुणवत्ता में कोई कोताही न बरती जाए।
- पुलिस बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आधुनिक पुलिसिंग की पहली शर्त है।

पुलिस कार्यालय के वार्षिक निरीक्षण के दौरान श्रीमती अग्रवाल ने अभिलेख, अपराध और गोपनीय शाखाओं का सूक्ष्म परीक्षण किया। उन्होंने लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने और रिकॉर्ड प्रबंधन को आधुनिक बनाने पर जोर दिया।
“स्मार्ट पुलिसिंग के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग अनिवार्य है। सभी शाखाओं को समन्वय के साथ काम करते हुए फाइलों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना होगा।” – रिद्धिम अग्रवाल, आईजी कुमाऊं
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ अक्षय प्रहलाद कोंडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आईजी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पुलिस की कार्यप्रणाली केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर ‘जन-केंद्रित’ होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


इस निरीक्षण को महज एक औपचारिक प्रक्रिया के बजाय पुलिसिंग व्यवस्था को सुधारने की एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही ही विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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