मुलाकात की प्रतीक्षा में लगे मोहम्मद यूनुस को पीएम मोदी ने भेजा पत्र, 1971 का इतिहास याद दिलाया

ढाका ,27 मार्च। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की प्रतीक्षा कर रहे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक विशेष पत्र प्राप्त हुआ है। यह पत्र बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस, 26 मार्च, के अवसर पर पीएम मोदी द्वारा लिखा गया है – दिन जो 1971 की उस ऐतिहासिक घड़ी की याद दिलाता है, जब भारत की सैन्य सहायता से बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने 1971 के मुक्ति संग्राम की अटूट भावना और भारत-बांग्लादेश के गहरे संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने बांग्लादेश को उसकी स्थापना में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाते हुए कहा कि यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है। मोदी जी ने आगे बताया कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की भावना आज भी दोनों देशों के सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में मार्गदर्शक बनी हुई है, जिससे आम जनता को ठोस लाभ मिल रहा है।
इस पत्र का जिक्र विशेष रूप से तब किया गया है जब बांग्लादेश में बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत से संबंधित प्रतीकों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले वर्ष 5 अगस्त को कथित क्रांति के बाद सत्ता से शेख हसीना को हटाने के प्रयास और उसके बाद शेख मुजीबुर्रहमान से जुड़े चिह्नों पर हुए हमलों के परिप्रेक्ष्य में यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) के लोगों को सैन्य, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान की थी। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ संघर्ष करते हुए 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की हार सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया।
वर्तमान परिदृश्य में, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए संघर्षरत है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की राजनीतिक वापसी की चर्चा तेज़ी से हो रही है। सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश के नए शासन ने भारत से टकराव वाला रुख अपनाया है, लेकिन कई मामलों में यह देश अब भारत पर निर्भरता के चलते भारत के करीब आ रहा है।
इस प्रकार, पीएम मोदी ने 1971 के मुक्ति संग्राम का हवाला देते हुए बांग्लादेश को यह संदेश दिया है कि भारत की भूमिका दोनों देशों के इतिहास और वर्तमान संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो आगे भी सहयोग और साझेदारी की दिशा में प्रेरणा का कार्य करेगी।

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