जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन, विधायकों की पेंशन और भत्तों में बढ़ोतरी पर जताया विरोध
देहरादून,18फरवरी2025। उत्तराखंड में मूल निवास और भू-क़ानून समेत कई जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए विधानसभा की ओर बढ़ रहे संघर्ष समिति के सदस्यों को पुलिस ने रिस्पना पुल के पास रोक लिया। समिति के संयोजक मोहित डिमरी और उनके साथियों का कहना था कि वे मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करती है, तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
संघर्ष समिति के सदस्यों ने राज्य सरकार को भू-क़ानून से जुड़ा प्रस्ताव और 2022 के विधानसभा चुनावों में किए गए वादों की सूची सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए मांग की कि इन विषयों पर विधानसभा में चर्चा हो। मोहित डिमरी ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भू-क़ानून आम जनता के हित में बने, न कि भू-माफ़ियाओं के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि एक साल के निवास और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को भी लेकर जनता में असंतोष है।
विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल
मोहित डिमरी ने विधायकों और पूर्व विधायकों की पेंशन और भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य के उपनल और आउटसोर्स कर्मचारी समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने मानदेय में बढ़ोतरी के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकार को केवल विधायकों और पूर्व विधायकों की सुविधाओं की चिंता है। उन्होंने पूछा कि सरकार यह क्यों नहीं सोचती कि अल्प वेतन में काम करने वाले कर्मचारी अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर रहे हैं?
2022 चुनावी वादों पर सरकार को घेरा
डिमरी ने भाजपा के दृष्टिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने बेरोजगारों को एक साल तक तीन हज़ार रुपये प्रति माह देने की योजना लागू करने की बात कही थी, लेकिन अब तक कितने युवाओं को इसका लाभ मिला, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए। इसी तरह, पीएम किसान सम्मान निधि की तर्ज पर सीएम किसान प्रोत्साहन निधि में हर साल दो हज़ार रुपये देने की घोषणा भी कागज़ों तक ही सीमित है।
उन्होंने कहा कि हर जिले में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने, प्रत्येक ब्लॉक में एक व्यावसायिक कॉलेज स्थापित करने, पूर्व सैनिकों के लिए जनरल बिपिन रावत क्रेडिट गारंटी फंड बनाने जैसी घोषणाएं भी अब तक अधूरी हैं।
दिल्ली की तर्ज पर फ्री बिजली-पानी की मांग
संघर्ष समिति ने उत्तराखंड में दिल्ली की तर्ज पर फ्री बिजली और पानी देने की मांग उठाई। डिमरी ने कहा कि राज्य बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बावजूद जनता को महंगी दरों पर बिजली दी जा रही है। पानी के प्राकृतिक स्रोतों से समृद्ध होने के बावजूद यहां के नागरिकों को महंगे बिल भरने पड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार गरीब महिलाओं को भी आर्थिक सहायता देने के लिए योजना बनाए, ताकि वे सशक्त बन सकें।
इस प्रदर्शन में संघर्ष समिति के कई सदस्य शामिल रहे, जिनमें विनोद चौहान, अनिल डोभाल, पंकज उनियाल, विपिन नेगी, गौतम राणा, निरंजन चौहान, देवेंद्र बेलवाल, बॉबी रांगड़, हिमांशु रावत, सुदेश भट्ट, आशीष नौटियाल, सुमित थपलियाल, मनिंदर बिष्ट, ललित श्रीवास्तव, विनोद पोखरियाल और गौरव कुमार आदि मौजूद रहे।

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