उत्तराखंड बीजेपी में सियासी घमासान

बिशन सिंह चुफाल और हेमराज बिष्ट के बीच तनातनी ने लिया तूल

डीडीहाट में विधायक और दायित्वधारी के बीच खुला टकराव, विकास कार्यों पर बाधा का आरोप, पार्टी में युवा-वरिष्ठ नेतृत्व के बीच बढ़ता अंतर्विरोध

देहरादून। उत्तराखंड की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में इन दिनों सियासी उथल-पुथल मची हुई है। डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक बिशन सिंह चुफाल और खेल परिषद के उपाध्यक्ष हेमराज बिष्ट के बीच का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। यह टकराव न केवल स्थानीय राजनीति को गरमा रहा है, बल्कि बीजेपी के भीतर युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ते अंतर्विरोध को भी उजागर कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुफाल ने बिष्ट पर उनके क्षेत्र में विकास कार्यों में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि बिष्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुफाल को अपना “गुरु” और “पिता तुल्य” बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की है।

विवाद की जड़: विकास कार्यों में बाधा का आरोप
डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल ने हेमराज बिष्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि वह विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों को बाधित कर रहे हैं। चुफाल का दावा है कि बिष्ट, जो खेल परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में दायित्वधारी हैं, उनके क्षेत्र की जनता के हित में चल रहे कार्यों में रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने सरकार से बिष्ट को उनके पद से हटाने की मांग की है। यह पहली बार नहीं है जब चुफाल ने बिष्ट के खिलाफ मोर्चा खोला हो। सूत्रों के मुताबिक, चुफाल को बिष्ट का दायित्वधारी बनाया जाना स्वीकार नहीं है, और इसे वह अपनी सियासी हैसियत पर चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
वहीं, हेमराज बिष्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा, “मैं एक गरीब किसान का बेटा हूं। मेरे पिता खेतों में मजदूरी करके परिवार चलाते थे। मैंने और मेरे जैसे कई कार्यकर्ताओं ने मेहनत और लगन से बीजेपी के लिए काम किया है।” बिष्ट ने चुफाल के आरोपों को “आशीर्वाद” बताते हुए कहा कि वह न तो विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं और न ही जनता के हितों को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा रखते हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि दायित्वधारी बनने के बाद वह अपने क्षेत्र में सम्मान समारोह तक आयोजित नहीं कर पाए हैं, क्योंकि उनके दौरे के दौरान कार्यकर्ता डरे हुए रहते हैं और कार्यालयों पर ताले लटक जाते हैं।

पार्टी में युवा बनाम वरिष्ठ नेतृत्व
यह विवाद बीजेपी के भीतर युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुफाल जैसे अनुभवी नेता, जो उत्तराखंड की सियासत में लंबे समय से सक्रिय हैं, युवा नेताओं को अपनी जगह लेते देख असहज हो रहे हैं। हाल के जिला पंचायत चुनावों में चुफाल के करीबी लोगों की भागीदारी और उनके प्रभाव को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना है कि चुफाल शायद हेमराज बिष्ट को एक “प्यादे” के रूप में देख रहे हैं, जिनके जरिए वह अपनी सियासी पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं।
कुछ वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, “यह टकराव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि बीजेपी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। चुफाल जैसे नेता, जो लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में दबदबा रखते हैं, शायद नए चेहरों को अपनी जगह लेते देख बेचैन हैं। यह बीजेपी के लिए एक चुनौती है, क्योंकि पार्टी को युवा ऊर्जा और अनुभवी नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना होगा।”

पार्टी की छवि पर सवाल
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड में बीजेपी सरकार पहले ही कई मुद्दों पर चर्चा में रही है। हाल के महीनों में, सरकार के कुछ फैसलों और मंत्रियों के बयानों ने विवादों को जन्म दिया है। डीडीहाट का यह ताजा प्रकरण बीजेपी की आंतरिक एकता पर सवाल उठा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चुफाल का अपनी ही पार्टी के दायित्वधारी पर हमला करना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि चुफाल का यह कदम उनकी अपनी पार्टी को कमजोर करने वाला हो सकता है। अगर वह हेमराज बिष्ट को निशाना बनाकर कोई बड़ी सियासी पारी खेलने की सोच रहे हैं, तो यह बीजेपी के लिए एक गलत संदेश दे सकता है।

यह विवाद बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। एक ओर जहां पार्टी शीर्ष नेतृत्व युवा नेताओं को प्रोत्साहित करने की बात करता है, वहीं वरिष्ठ नेताओं का असंतोष पार्टी की एकता को प्रभावित कर सकता है। हेमराज बिष्ट जैसे युवा नेताओं का कहना है कि वे पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए। दूसरी ओर, चुफाल जैसे अनुभवी नेता अपनी सियासी विरासत को बचाने के लिए सक्रिय हैं।
बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पार्टी आलाकमान इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश करेगा, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुट छवि बनी रहे।

डीडीहाट का यह सियासी ड्रामा न केवल बीजेपी के भीतर की खींचतान को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या पार्टी अपने युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बना पाएगी। बिशन सिंह चुफाल और हेमराज बिष्ट के बीच का यह टकराव भले ही स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम उत्तराखंड की सियासत और बीजेपी की रणनीति पर पड़ सकते हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी इस आंतरिक संकट को कैसे सुलझाती है और क्या यह विवाद पार्टी की एकता को प्रभावित करेगा।

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