अंकिता भंडारी केस में फिर गरमाई सियासत, 20 जुलाई की सुनवाई से पहले आंदोलन तेज करने की चेतावनी

अंकिता भंडारी प्रकरण: संघर्ष मंच ने सरकार और CBI पर उठाए सवाल, 20 जुलाई की सुनवाई से पहले तेज किया न्याय का अभियान

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया और सीबीआई जांच की रफ्तार को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद होने लगी है। अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यदि जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई और न्यायालय में राज्य सरकार ने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रखा, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि 20 जुलाई को मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है। उनके अनुसार, इस दौरान दोषियों की ओर से सजा में राहत और जमानत से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। ऐसे में सरकार को न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को किसी प्रकार की राहत न मिले।

प्रेस वार्ता में मंच की सदस्य निर्मला बिष्ट ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि जांच एजेंसी इसकी प्रगति को सार्वजनिक करे और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच पूरी करे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, रिजॉर्ट संस्कृति और अवैध गतिविधियों जैसे मुद्दों पर सरकार को अधिक प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

मंच की सदस्य सुजाता पॉल ने कहा कि संगठन लगातार इस प्रकरण से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा है। उनका आरोप था कि जिन लोगों के नाम इस मामले में चर्चा में आए, उनसे अब तक पूछताछ नहीं की गई है। उन्होंने रिजॉर्ट को ध्वस्त किए जाने से जुड़े घटनाक्रम की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई। साथ ही मुख्यमंत्री के पद पर रहते निष्पक्ष जांच को लेकर भी सवाल उठाए और अपने पूर्व रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की।

मोहित डिमरी ने कहा कि सीबीआई को जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय से इसकी प्रगति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले सीबीआई जांच पूरी नहीं होती और मामले के सभी पहलुओं, जिनमें कथित वीआईपी एंगल भी शामिल है, पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तो संघर्ष मंच अपने आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देगा।

हरिओम पाली और विमला कोहली ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिजनों को न्याय दिलाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जाए तथा किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर न माना जाए।

प्रेस वार्ता में त्रिलोचन भट्ट, मनीष केड़ियाल, एन. राघवेंद्र सहित संघर्ष मंच के कई सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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