स्पेशल विजिलेंस कोर्ट के नोटिस पर सियासत गरम, कांग्रेस ने मंत्री गणेश जोशी को पद से हटाने की मांग उठाई

देहरादून । विशेष सतर्कता (स्पेशल विजिलेंस) न्यायालय द्वारा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को नोटिस जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता एवं अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर मांग की है कि भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरण की जांच पूरी होने तक मंत्री गणेश जोशी को मंत्रिमंडल से अलग किया जाए।

पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी घोषित “जीरो टॉलरेंस” नीति पर कायम है, तो इसका प्रभाव केवल बयानों में नहीं बल्कि निर्णयों में भी दिखाई देना चाहिए। उनका कहना है कि विशेष न्यायाधीश, सतर्कता अधिष्ठान, गढ़वाल परिक्षेत्र, देहरादून द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया गया है और मंत्री को 3 सितंबर 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सरकार को नैतिक आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक जीवन से जुड़े पदों पर नैतिक जवाबदेही सर्वोपरि होती है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित मंत्री को पद से अलग कर सरकार एक स्पष्ट संदेश दे सकती है कि कानून और नैतिकता सत्ता से ऊपर हैं।

क्षेत्री ने प्रदेश के युवाओं, अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की। उन्होंने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए कहा कि प्राप्त शिकायतों की समीक्षा कर पात्र मामलों में निःशुल्क विधिक सहायता एवं पैरवी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता एवं कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में राजनीतिक संरक्षण नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व सर्वोपरि होना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता आशीष नौटियाल ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार को निष्पक्ष जांच का वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता आशीष सैनी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष किसी दल का नहीं, बल्कि समाज और संविधान की रक्षा का अभियान है। कांग्रेस नेता हिमांशु बहुगुणा ने भी सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

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