

देहरादून। प्रदेश में हाल में आयोजित नर्सिंग भर्ती परीक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार संघ ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों के लेन-देन के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठनों ने सरकार को तीन दिन का समय देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर के अनुसार, संगठन लंबे समय से नर्सिंग पदों पर वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर आवाज उठाता रहा है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर पूर्व में सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई तरह की आशंकाएं और शिकायतें रखी गई थीं, लेकिन इसके बावजूद 25 जून, 25 जुलाई और 26 जुलाई को परीक्षा आयोजित की गई।
आंदोलनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित आर्थिक लेन-देन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। नवल पुंडीर और राम कंडवाल का दावा है कि उन्हें कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें नौकरी दिलाने के नाम पर एक महिला अभ्यर्थी से बड़ी रकम मांगे जाने और भुगतान किए जाने की बात सामने आती है। राम कंडवाल के मुताबिक चारू चंद्र जोशी नाम के व्यक्ति पर महिला अभ्यर्थी से करीब 32 लाख रुपये मांगने का आरोप है। आंदोलनकारियों का दावा है कि अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से कथित रूप से रकम भेजी गई और कुल लेन-देन करीब 35 लाख रुपये तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
आंदोलनकारियों का यह भी दावा है कि कथित भुगतान की व्यवस्था के लिए महिला अभ्यर्थी को सोना और अन्य सामान तक गिरवी रखना पड़ा। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कथित लेन-देन की वास्तविकता और इसमें संबंधित व्यक्ति की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
नर्सिंग एकता मंच ने पूरे मामले में किसी बड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका की आशंका जताते हुए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बिचौलियों और संभावित अंदरूनी मिलीभगत की जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि नौकरी के नाम पर किसी अभ्यर्थी से लाखों रुपये मांगे जाने का मामला सामने आया है तो इसकी तह तक जाना जरूरी है। आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब दो हजार अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन नहीं किए जाने के मुद्दे को भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
संगठन ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की जांच एसटीएफ या एसआईटी जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक भर्ती परीक्षा को निरस्त करने पर भी विचार करने की मांग उठाई गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जांच के परिणाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों के साथ प्रदेश की जनता के सामने भी पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार संघ ने सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में जांच को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ वरिष्ठ अभ्यर्थी और समर्थन कर रहे अन्य संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री से भी अलग जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नोट: इस खबर में शामिल आर्थिक लेन-देन, नौकरी दिलाने के नाम पर रकम मांगने और भर्ती प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत से जुड़े आरोप आंदोलनकारियों एवं अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की अभी आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता अथवा कथित लेन-देन की वास्तविकता जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। खबर का उद्देश्य लगाए गए आरोपों और जांच की मांग को सामने रखना है, न कि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना।

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