पौड़ी गढ़वाल। कभी-कभी एक निर्णय, एक संवेदना, और एक पहल किसी के जीवन की दिशा बदल देती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण जनपद पौड़ी गढ़वाल में सामने आया, जब एक निर्धन बालिका राधिका की शिक्षा की लौ बुझने से पहले जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने उसे फिर से प्रज्वलित कर दिया।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
पाबौ मल्ला गांव की राधिका, जिसने 2024 में बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, पारिवारिक संकट और आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई से वंचित हो रही थी। पिता का निधन और मां की मजदूरी से चल रहा घर, राधिका की शिक्षा के सपनों को धुंधला कर रहा था। लेकिन उसकी आंखों में अब भी पढ़ाई की चमक थी—और यही चमक जिलाधिकारी ने देखी।

प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता
जिलाधिकारी भदौरिया ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत राधिका की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने न केवल बी.ए. ओपन में उसका प्रवेश कराया, बल्कि प्रथम सेमेस्टर की ₹5000 फीस भी जमा की। पठन-पाठन सामग्री भी उपलब्ध करायी गयी और आगे की शिक्षा का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जाएगा।
एक छात्रा, अनेक संभावनाएं
राधिका ने भावुक होकर कहा, “मेरी इच्छा हमेशा पढ़ाई करने की रही, लेकिन हालात ने रोक दिया था। जिलाधिकारी की मदद से आज मेरा दाखिला हो गया है। मैं उनके और बाल विकास विभाग की आभारी हूं।” यह केवल एक छात्रा की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों बालिकाओं की आशा है जो शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।

जिलाधिकारी का संदेश
स्वाति एस. भदौरिया ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य है कि कोई भी प्रतिभावान बालिका केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना बेटियों के लिये एक सशक्त माध्यम बन रही है। आगे भी इसी भावना से कार्य किये जाएंगे।”

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