राहुल गांधी ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद दीपक’ को गले लगाया, कहा- “ऐसी एकता की लौ हर युवा में जलनी चाहिए”

नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ से मुलाकात की। यह मुलाकात दिल्ली के 10 जनपथ स्थित राहुल गांधी के आवास पर हुई, जहां राहुल ने दीपक को गले लगाकर उनकी बहादुरी और इंसानियत की सराहना की।

राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद कहा, “उत्तराखंड के भाई मोहम्मद दीपक से मुलाकात की। एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए। दीपक ‘मोहब्बत की दुकान’ के योद्धा हैं।” उन्होंने दीपक को निडर और इंसानियत की जीती-जागती मिसाल बताया।

घटना की पृष्ठभूमि क्या है?
26 जनवरी 2026 को कोटद्वार के पटेल मार्ग बाजार में 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ के नाम पर कुछ लोगों (बजरंग दल से जुड़े बताए गए) ने विवाद खड़ा किया था। उन्होंने ‘बाबा’ शब्द को हिंदू धर्म से जोड़कर आपत्ति जताई।

इस दौरान जिम संचालक दीपक कुमार ने बीच-बचाव किया और कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है। मैं न हिंदू हूं, न मुस्लिम—सिर्फ इंसान हूं।” उनका यह वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ‘हिंदू हीरो’, ‘संविधान का योद्धा’ और ‘मोहब्बत की दुकान का योद्धा’ कहा जाने लगा। राहुल गांधी ने पहले भी X पर दीपक की तारीफ की थी और उन्हें “भारत का हीरो” बताया था।

मुलाकात की खास बातें

  • राहुल गांधी ने दीपक के परिवार से बात की और उनकी पत्नी को भरोसा दिलाया कि डरने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया।
  • राहुल ने वादा किया कि वे जल्द कोटद्वार जाएंगे और दीपक के जिम में मेंबरशिप लेंगे।
  • दीपक ने बताया कि मुलाकात में सोनिया गांधी भी मौजूद थीं (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक)।
  • दीपक ने साफ किया कि उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है; वे बस अपना जिम चलाना चाहते हैं। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि अब उनकी हिम्मत चार गुना बढ़ गई है।

कांग्रेस इसे धार्मिक सद्भाव, भाईचारे और नफरत के खिलाफ लड़ाई का प्रतीक बता रही है। पार्टी ने मुलाकात की तस्वीरें शेयर कर दीपक को प्रेरणा स्रोत बताया।

वहीं, सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे सराहा, तो कुछ ने राजनीतिक स्टंट करार दिया। यह घटना ऐसे वक्त में हुई है जब देश में धार्मिक एकता और युवाओं की भूमिका पर चर्चा जोरों पर है।

दीपक की इस छोटी-सी बहादुरी ने बड़े संदेश दिए हैं—इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं।

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