आरसीएम की ‘रूपांतरण यात्रा’ को देहरादून में मिला भव्य समर्थन

75 शहरों में 10 लाख लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य

देहरादून: आरसीएम कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्रा. लि. की राष्ट्रव्यापी ‘रूपांतरण यात्रा’ का नवीनतम पड़ाव देहरादून में जबरदस्त जनसमर्थन के साथ संपन्न हुआ। कंपनी के तीन मूल स्तंभों—स्वास्थ्य, सेवा और संस्कार—को बढ़ावा देने वाली इस यात्रा में हजारों नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो आरसीएम की जन-आधारित विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सामुदायिक भागीदारी और जन-उत्साह
मां दुर्गा मंदिर ग्राउंड, केदारपुरम, दून यूनिवर्सिटी के पास आयोजित इस आयोजन में युवाओं, महिलाओं और परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। नागरिकों ने न केवल रक्तदान किया बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और आत्मनिर्भरता के अवसरों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। सामूहिक उत्साह ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखण्ड राज्य आरसीएम की पहलों के प्रति मजबूत जुड़ाव रखता है।
कंपनी ने अनुमान लगाया है कि 16 सितंबर 2025 को शुरू हुई और 23 दिसंबर 2025 को समाप्त होने वाली 75 शहरों की यह यात्रा समापन तक लगभग एक मिलियन (10 लाख) लोगों तक अपनी पहुँच बना लेगी।

आर्थिक सशक्तिकरण और नेटवर्क का विस्तार
रूपांतरण यात्रा के शुभारंभ के बाद से अब तक 20,000 से अधिक नवोद्यमी आरसीएम परिवार से जुड़ चुके हैं, जिससे कंपनी का सक्रिय एसोसिएट बायर्स का नेटवर्क दो मिलियन से अधिक हो गया है।

  • स्थायी स्वरोजगार: कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ छाबड़ा ने कहा, “हम हर घर को बेहतर स्वास्थ्य, मजबूत मूल्यों और नए आर्थिक अवसरों से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
  • महिला सशक्तिकरण: मैनेजिंग डायरेक्टर प्रियंका अग्रवाल ने जोर दिया, “हम हर महिला को गरिमा, शक्ति और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि वे नए भारत के निर्माण में समान रूप से योगदान दे सकें।”
    स्वास्थ्य और संस्कार पर जोर
    देहरादून कार्यक्रम में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसके साथ ही यात्रा के दौरान अब तक 2,000 से अधिक दाताओं का आँकड़ा पार हो चुका है।
    सीईओ मनोज कुमार ने कहा कि यात्रा का उत्साह पूरे भारत में लाखों लोगों को सशक्त बनाता रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी और समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।
    पुस्तक विमोचन और उत्पाद अनुभव
    कार्यक्रम का आयोजन दो भागों में किया गया, सुबह स्वास्थ्य और सेवा पर केंद्रित गतिविधियाँ थीं, जबकि शाम को उत्सव और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं। हाल ही में लॉन्च हुई पुस्तक “मनसा वाचा कर्मणा – एक कर्मयोगी की जीवनी”, जो आरसीएम के संस्थापक तिलोकचंद छाबड़ा के जीवन पर आधारित है, आकर्षण का केंद्र रही।
    आगंतुकों को आरसीएम के उत्पादों से परिचित कराने के लिए एक रूपांतरण मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें न्यूट्रीचार्ज, कीसोल, स्वीच्छा और गुड डॉट जैसे प्रमुख ब्रांडों के इंटरैक्टिव बूथ्स लगाए गए थे।
    आरसीएम के तीन अत्याधुनिक निर्माण संयंत्र भीलवाड़ा, गुवाहाटी और रुड़की में स्थित हैं, और कंपनी के पास 400 से अधिक उत्पादों का व्यापक पोर्टफोलियो है। आरसीएम की “आरसीएम सेवा” पहल के तहत मूल्य-आधारित शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति जागरूकता जैसी सामाजिक गतिविधियाँ भी चलाई जाती हैं।
    जैसे-जैसे यह यात्रा अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है, देहरादून और उत्तराखण्ड में छोड़ी गई सकारात्मक ऊर्जा नए विकास और सामुदायिक कल्याण को आगे बढ़ाएगी।
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