

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली से उत्तराखंड लौटने के बाद सोमवार को देहरादून स्थित शहीद स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राज्य आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से हुआ है और वह आंदोलनकारियों के सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होने देंगे।
हरीश रावत ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने अलग राज्य के लिए लंबा संघर्ष किया। उनके योगदान को सम्मान देना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य आंदोलनकारियों की कई अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस सरकार के समय आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई थी।
उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर आंदोलनकारियों की पेंशन को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने सहित उनकी लंबित मांगों पर गंभीरता से काम किया जाएगा। इस मौके पर उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी धीरेंद्र प्रताप तथा सुरेंद्र कुमार ने भी आंदोलनकारियों की मांगों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
अपने ओएसडी से जुड़े आरोपों और कांग्रेस में इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवालों पर हरीश रावत ने कहा कि पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने संकेत दिया कि वह जल्द ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह पार्टी के एक सिपाही हैं और संगठन जो निर्णय करेगा, उसका पालन करेंगे।उन्होंने अपने ओएसडी से जुड़े मामले को लेकर भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। रावत ने कहा कि चुनाव के समय सीबीआई और ईडी की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो जाती हैं और कुछ समय बाद इन घटनाक्रमों के पीछे की तस्वीर स्पष्ट होती है।

उत्तराखंड पहुंचने पर हरीश रावत ने रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद नारसन बॉर्डर से हरिद्वार तक विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। हरिद्वार पहुंचने पर उन्होंने स्वामी विवेकानंद गंगा घाट पर पूजा-अर्चना कर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। इस दौरान रावत ने अपने स्वास्थ्य और उपचार के संबंध में भी जानकारी दी तथा इलाज के दौरान सहयोग करने वाले चिकित्सकों और उनका हालचाल लेने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों का आभार जताया।
हरीश रावत ने मीठी बेरी में पुल निर्माण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पुल का निर्माण काफी पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से मामले का संज्ञान लेकर पुल निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी, वीरेंद्र पोखरियाल, लालचंद शर्मा, संजय शर्मा, राज्य आंदोलनकारी जगमोहन नेगी, प्रदीप कुकरेती, अंबुज शर्मा, विशंभर बौंठियाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

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