देहरादून: उत्तराखंड में चुनावी साल के मद्देनजर आम जनता को विद्युत दरों को लेकर बड़ी राहत मिली है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के दरों में भारी वृद्धि के प्रस्ताव को खारिज करते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालने का फैसला किया है।
आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वितरण निगम द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए करीब 17 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था, जो कुल मिलाकर 18 प्रतिशत से अधिक बैठ रहा था। हालांकि, आयोग ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा दरों को ही जारी रखने का निर्णय लिया।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह राहतभरी खबर है कि पहले से लागू दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट लगभग 1.85 रुपये की दर यथावत रखी गई है। वहीं, 0 से 100 यूनिट, 101 से 200 यूनिट, 201 से 400 यूनिट तथा इससे अधिक खपत वाली श्रेणियों के लिए भी पुरानी दरें ही जारी रहेंगी।
हालाँकि, आयोग ने एकल बिंदु आपूर्ति (सिंगल प्वाइंट सप्लाई) वाले उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए उनकी दरों में कमी की है, जो पहले से अधिक थीं। अब यह दर लगभग 6.25 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है।
इसके अलावा, नियामक आयोग ने सभी उपभोक्ता श्रेणियों के लिए स्थायी शुल्क (फिक्स्ड चार्ज) में भी किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। सब्सिडी के वितरण को लेकर भी संतुलन निर्धारित मानकों के दायरे में रखा गया है।
आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने, तकनीकी नुकसान को कम करने और स्मार्ट मीटर योजना को गति देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं। कुल मिलाकर, विद्युत नियामक आयोग का यह फैसला आम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जहाँ एक ओर दरों को स्थिर रखकर जनता को महंगाई से राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था में सुधार पर भी जोर दिया गया है। चुनावी माहौल को देखते हुए इस निर्णय को एक अहम और रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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