वाराणसी ,03 सितंबर (आरएनएस)। बिहार में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी का मामला गरमाया हुआ है। मंगलवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया।
शंकराचार्य ने कहा, लोगों की बुद्धि में विकार आ गया है। सभी को गाय माता का दूध पीना चाहिए, ताकि उनकी बुद्धि शुद्ध हो और माताओं का अपमान बंद हो। कोई भी नेता हो, उसे किसी की मां या पिता पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मां हर व्यक्ति के लिए पूजनीय होती है और सभी की मां का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा, शास्त्रों में कहा गया है कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। यह भारत की संस्कृति है।
उन्होंने सलाह दी कि राजनीतिक लड़ाई व्यक्तिगत स्तर पर होनी चाहिए, न कि माता-पिता जैसे पवित्र रिश्तों को निशाना बनाकर। शंकराचार्य ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल निंदनीय हैं, बल्कि समाज में नकारात्मकता फैलाती हैं। उन्होंने सभी से मातृ-सम्मान की भावना को बनाए रखने की अपील की।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री की माता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में हंगामा मचा दिया है और विपक्षी दलों पर इस मामले में जवाबदेही की मांग उठ रही है। शंकराचार्य की टिप्पणी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि यह न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा है।
उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी को मिलकर नैतिकता और सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। इस बीच, इस मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी तेज हो रही है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी को बताया निंदनीय
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