उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में छात्रों के भविष्य को लेकर घेराबंदी और संघर्ष

देहरादून, 12 अप्रैल 2025(मेरोउत्तराखंड): उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यू.टी.यू.) में सॉफ्टवेयर घोटाले की वजह से उत्पन्न विवाद और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के खिलाफ छात्रों का संघर्ष लगातार जारी है। डी.ए.वी. छात्र संघ के अध्यक्ष, सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व में छात्रों ने पिछले दो महीनों से सड़कों पर प्रदर्शन कर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है।

समस्या की पृष्ठभूमि

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में ई-रिसोर्स प्लानिंग (ई.आर.पी.) सॉफ्टवेयर को लेकर चल रहे विवाद ने छात्रों को चिंतित कर दिया है। शासन की एक जांच समिति ने कुलपति डॉ. ओंकार यादव के द्वारा अपनी निकट संबंधी के ई.आर.पी. को करोड़ों रुपये दिलवाने के मामले में मिलीभगत की पुष्टि की है। इसके बावजूद, डॉ. यादव ने विवादित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को नकार दिया और इसे विश्वविद्यालय में शुक्रवार को ही संचालित रखने का निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा मूल्यांकन में गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है।

शिक्षक और कॉलेजों की स्थिति

विवादित सॉफ्टवेयर के कारण कई शिक्षक इस प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन मूल्यांकन से चैनल हो रहे हैं। उनका मानना है कि यदि वे इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, तो उनके नाम भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी. के. पटेल बार-बार कॉलेजों को धमकी दे रहे हैं कि यदि वे मूल्यांकन में देरी करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बावजूद परीक्षा परिणामों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जिससे छात्रों में गहरी निराशा और चिंता बनी हुई है।

छात्रों की चिंताएं

छात्र संघ के अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि इस विवाद के चलते छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। कई छात्रों को शिक्षा लोन स्वीकृत नहीं हो रहा है और उन्हें नौकरी हासिल करने में मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय युवा और छात्र एक उज्ज्वल भविष्य के हकदार हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की अनाचार और भ्रष्टाचार का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।

आंदोलन की चेतावनी

छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि अगले एक हफ्ते में विश्वविद्यालय और कॉलेजों के बीच के गतिरोध का समाधान नहीं निकाला गया और सभी परीक्षाओं के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए गए, तो छात्र संघ पूर्ण तालाबंदी करने का फैसला करेगा। यह स्पष्ट किया गया है कि इस तालाबंदी का समस्त जिम्मेदार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन होगा।

भविष्य की योजना

छात्र संघ ने अपनी आगे की योजना भी साझा की है। अगर प्रशासन ने उनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो वे राज्य स्तर पर आंदोलन तेज करने का फैसला कर सकते हैं। इसके अंतर्गत धरना-प्रदर्शन, आम सभा और राज्यपाल को ज्ञापन देना शामिल हो सकता है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थान सही और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कार्य करें और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखें।

छात्र संघ का यह स्पष्ट संदेश है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हैं और किसी भी प्रकार के अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को चाहिए कि वे इस मामले पर तुरंत ध्यान दें और छात्रों के भविष्य को स्थिरता प्रदान करें।

कुलपति व परीक्षा नियंत्रक क़े अपने स्टाफ को प्रेषित पत्र : यँहा देखें

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