भारत में जल्द आ सकती है स्टार लिंक  इंटरनेट सेवा, केंद्रीय मंत्री से मिले कंपनी प्रतिनिधि; जानिए खर्च और फायदे

नई दिल्ली ,21 अपै्रल। भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक द्वारा सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा लॉन्च किए जाने की चर्चाएं पिछले कई महीनों से चल रही हैं, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि देश में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। हाल ही में स्टारलिंक के कई बड़े प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। इस मुलाकात के बाद से भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर कयास तेज हो गए हैं।
स्टारलिंक की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट कनेक्टिविटी का एक बड़ा फायदा यह होगा कि यह उन क्षेत्रों में भी आसानी से इंटरनेट उपलब्ध करा सकती है जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क के टावर या केबल ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है। इससे देश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में भी डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाई जा सकेगी।
हालांकि, भारत में स्टारलिंक कनेक्शन लेने के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी और इसका मासिक खर्च कितना होगा, इसकी फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी कंपनी या सरकार की तरफ से नहीं दी गई है। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में इसकी मासिक कीमत करीब 9,000 रुपये से लेकर 10,500 रुपये तक की हो सकती है। यह कीमत फिलहाल अमेरिका जैसे देशों में ली जाने वाली फीस के बराबर है। अगर भारत में इसी कीमत में इसे लॉन्च किया जाता है, तो यह आम नागरिकों के बड़े वर्ग की पहुंच से दूर हो सकता है।
मासिक शुल्क के अलावा, स्टारलिंक सर्विस का फायदा लेने के लिए ग्राहकों को एक खास तरह की किट भी खरीदनी होगी। इस किट में सैटेलाइट डिश, राउटर और इंस्टॉलेशन के लिए जरूरी सपोर्ट शामिल होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टारलिंक के इस किट की कीमत 30 हजार रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक हो सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ग्राहकों को पहले साल के लिए कुल डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं, जिसमें किट की कीमत और मासिक शुल्क शामिल होगा, जबकि दूसरे साल से सिर्फ मासिक सर्विस फीस ही देनी होगी।
स्पीड की बात करें तो स्टारलिंक के जरिए भारत में हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने वाली है। बताया जा रहा है कि इसमें यूजर्स को सामान्य तौर पर 100रूड्ढश्चह्य से लेकर 200 रूड्ढश्चह्य तक की तगड़ी इंटरनेट स्पीड मिलेगी। इसमें मौजूदा ब्रॉडबैंड की तुलना में लेटेंसी (डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय) भी कम होगी, जिससे ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉल जैसे कामों में काफी बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री के साथ हुई मुलाकात और सैटेलाइट इंटरनेट की आवश्यकता को देखते हुए, माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही स्टारलिंक या अन्य सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाताओं के लिए भारत में परिचालन शुरू करने के रास्ते खोल सकती है। हालांकि, कीमत का पहलू एक महत्वपूर्ण कारक रहेगा जो यह तय करेगा कि यह सेवा कितने लोगों तक पहुंच पाएगी।

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