तीन दिन व्हाट्सऐप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रख 80 वर्षीय बुजुर्ग को ठग डाला; उत्तराखंड, पंजाब, यूपी समेत सात राज्यों में धोखाधड़ी के केस दर्ज
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर थाना कुमाऊँ क्षेत्र रुद्रपुर पुलिस टीम ने जयपुर (राजस्थान) से एक शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार किया है, जो इफ्को के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना चुका था। आरोपी की पहचान 19 वर्षीय महीम सिसोदिया निवासी महावीर नगर, दुर्गापुरा, जयपुर के रूप में हुई है।
एसटीएफ के अनुसार, आरोपी ने 80 वर्षीय पीड़ित बुजुर्ग को दिसंबर 2025 में व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए दिल्ली क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बनकर कॉल किया। ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग में हुआ है और उनके विरुद्ध केस दर्ज है। डराकर उन्हें लगातार तीन दिन तक कॉल पर “डिजिटली अरेस्ट” कर रखा गया और विभिन्न बैंक खातों का सत्यापन के नाम पर उनसे 20 लाख रुपये अलग-अलग ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
तकनीकी विश्लेषण से हुआ पर्दाफाश
जांच में सामने आया कि रकम पीड़ित के एसबीआई खाते से 9 दिसंबर को आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजी गई थी, जहां से तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर निकासी कर ली गई। एसटीएफ ने बैंक लेनदेन, मोबाइल नंबर और व्हाट्सऐप डेटा का विश्लेषण कर आरोपी तक पहुंच बनाई। राजस्थान के जयपुर में छानबीन के बाद आरोपी महीम सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से एक आईफोन 14 प्रो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
पेशेवर ठग, 7 राज्यों में दर्ज हैं केस
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और चंडीगढ़ सहित सात राज्यों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। आरोपी लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबर बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में की गई कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, आईजी साइबर/एसटीएफ निलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह के निर्देशन व एएसपी कुश मिश्रा की पर्यवेक्षण में की गई। जांच टीम में साईबर थाना रुद्रपुर के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार, विवेचक निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार पंत, अ.उ.नि. विनोद कुमार विष्ट, हेड कांस्टेबल सोनू पांडे, कांस्टेबल विकास रावत तथा टेक्निकल कोर टीम देहरादून के उप निरीक्षक कुलदीप टम्टा और कांस्टेबल नितिन रमोला शामिल रहे।
जनता से अपील: “कोई ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं होती”
एसएसपी नवनीत सिंह ने जनता से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति से आने वाली वीडियो कॉल या पुलिस, सीबीआई, ईडी या टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी एजेंसी द्वारा “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी संदेहजनक आर्थिक अपराध या ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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