देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस की विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने राज्य में फैले अवैध शस्त्र लाइसेंस गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। कल देर रात्रि एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके पास से एक अवैध सैमी ऑटोमैटिक पिस्टल .30 बोर, पांच जिंदा कारतूस और एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किया गया। यह घटना देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के केहरी गांव में हुई, जहां एसटीएफ टीम ने एक जटिल अन्तर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखण्ड के जिलाधिकारी कार्यालयों की शस्त्र पंजिका में फर्जी लाइसेंस दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि एसटीएफ को पिछले कुछ समय से सूचना मिली थी कि बाहरी राज्यों से आए अपराधी फर्जी तरीके से अवैध शस्त्र लेकर उत्तराखण्ड की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराते हैं। टीम ने जिलाधिकारी कार्यालयों से पत्राचार कर जांच की, जिससे पता चला कि शस्त्र लाइसेंस नंबर 3805 का जिला मेरठ से स्थानांतरण होकर 2020 में देहरादून की पंजिका में अंकित हुआ था। लेकिन जांच में पता चला कि यह लाइसेंस जिला सिरसा से ट्रांसफर होकर आया था, और सिरसा के जिलाधिकारी कार्यालय से कभी जारी नहीं हुआ था। इस आधार पर टीम ने सुराग लगाकर अभियुक्त मनोज पुत्र भोपाल सिंह (निवासी ग्राम भैंसवाल, जनपद शामली, उत्तर प्रदेश) को 15 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ थाना प्रेमनगर में मु.अ.स. 09/2026 धारा 420, 467, 468, 471 भादवि और 25 आर्म्स एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।

पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि उत्तराखण्ड के कई जनपदों में बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर दर्ज कराए गए हैं। एसटीएफ टीम अब इन लाइसेंस धारकों और संलिप्त व्यक्तियों की जानकारी इकट्ठा कर आगे कार्रवाई करेगी। अभियुक्त का आपराधिक इतिहास भी चिंताजनक है – उसके खिलाफ देहरादून में धोखाधड़ी, बलवा और जान से मारने की धमकी के अभियोग पहले से पंजीकृत हैं, जिनमें FIR नंबर 19/2020, 205/2022 और 211/2022 शामिल हैं। अन्य राज्यों से उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच जारी है। एसटीएफ टीम में निरीक्षक अबुल कलाम, उपनिरीक्षक विद्यादत्त जोशी, अनु-निरीक्षक मनोज बेनीवाल, हेड कांस्टेबल बिजेन्द्र चौहान, देवेन्द्र मंमगाई, आरक्षी अनिल कुमार और मोहन असवाल शामिल हैं।
यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के गैंगस्टर और अवैध हथियारों के विरुद्ध सघन अभियान का हिस्सा है, जो राज्य की सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है। एसटीएफ ने इस गिरोह के तारों को उजागर कर अपराधियों को चुनौती दी है।

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