उत्तराखंड पुलिस की सख्त समीक्षा: महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, साइबर अपराध पर भी कसेगा शिकंजा

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस ने राज्य में अपराध और कानून व्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में गढ़वाल-कुमाऊं रेंज, एसटीएफ और सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ-साथ कई आईपीएस अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। एडीजी मुरुगेशन ने साफ किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों पर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रमुख निर्देश

बैठक में दिये गये निर्देशों के अनुसार—

  • अज्ञात महिला शवों की पहचान अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
  • महिलाओं और बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एंगल को ध्यान में रखते हुए गहन जांच की जाए।
  • एकाकी जीवन जी रहे वरिष्ठ नागरिकों से निरंतर संपर्क रखकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों में हर हाल में FIR दर्ज हो और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।
  • नये आपराधिक कानूनों के तहत ई-एफआईआर और जीरो-एफआईआर जैसी जनसुविधाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • वैज्ञानिक साक्ष्यों, फिंगर प्रिंट और केंद्रीय पोर्टलों की मदद से अपराधों का त्वरित खुलासा किया जाए।
  • गंभीर अपराधों में अनिवार्य रूप से FSL/फील्ड यूनिट को घटनास्थल पर भेजकर ई-साक्ष्य एप में दर्ज किया जाए।
  • अभ्यस्त अपराधियों की काली कमाई की जब्ती और चोरी-लूट के मामलों में शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित की जाए।

बैठक में आईजी अभिसूचना करन सिंह नगन्याल, आईजी सीसीटीएनएस सुनील कुमार मीणा, आईजी कार्मिक योगेन्द्र सिंह रावत और डीआईजी धीरेन्द्र सिंह गुन्ज्याल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

एडीजी ने कहा कि पुलिस का फोकस अब आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, साइबर अपराध पर नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा को और मजबूत करने पर है। उनके अनुसार यह अभियान पूरी तरह जन-केंद्रित और पारदर्शी होगा, ताकि राज्य के नागरिक निडर और सुरक्षित महसूस कर सकें।

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