देहरादून की सड़कों पर गूंजी पर्यावरण की पुकार: 17 पेड़ों की बलि पर बिफरे 23 संगठन, ‘चिपको आंदोलन’ की दी चेतावनी

वादाखिलाफी के खिलाफ ‘ग्रीन दून’ का हल्लाबोल: सीएम के आश्वासन के बाद भी कट रहे पेड़, 9 मार्च से आर-पार की जंग

देहरादून। राजधानी के पर्यावरण को बचाने और सरकार को उसके पुराने वादों की याद दिलाने के लिए रविवार को देहरादून की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘ग्रीन दून’ के बैनर तले जुटे शहर के 23 प्रमुख संगठनों ने ‘वायदा निभाओ’ पदयात्रा निकालकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। दिलाराम चौक से शुरू होकर सेंट्रियो मॉल तक चली इस पदयात्रा में समाज के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

प्रदर्शनकारियों ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष न्यू कैंट रोड के चौड़ीकरण के लिए जब 250 पेड़ों को काटने की योजना बनी थी, तब भारी जनविरोध के बाद स्वयं मुख्यमंत्री ने इसे रोकने की घोषणा की थी। उस समय सरकार की इस पहल का चौतरफा स्वागत हुआ था। लेकिन अब उसी क्षेत्र में चोरी-छिपे 17 पेड़ों को काटकर बाकी पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलाने की तैयारी की जा रही है, जो सीधे तौर पर जनता से किए गए वादे का उल्लंघन है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि देहरादून अब वह ‘हरा-भरा शहर’ नहीं रहा। मसूरी मार्ग जैसी परियोजनाओं में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है, जिसका नतीजा यह है कि मार्च की शुरुआत में ही शहर अप्रैल जैसी तपिश झेल रहा है। विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ यह खिलवाड़ अब बर्दाश्त से बाहर है।

प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो 9 मार्च से शहर में ऐतिहासिक ‘चिपको आंदोलन’ की पुनरावृत्ति होगी। इसके तहत प्रतिदिन पांच सदस्य कैंट रोड पर पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा करेंगे।

इस निर्णायक विरोध प्रदर्शन में हिमांशु अरोरा, इरा चौहान, रवि चोपड़ा, अनूप नौटियाल, जया सिंह, जगमोहन मेंदीरत्ता और कमला पंत समेत शहर की कई प्रबुद्ध हस्तियों ने हुंकार भरी। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रकृति की कीमत पर कंक्रीट का जाल उन्हें कतई मंजूर नहीं।

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