सरकार चिन्हिकरण की प्रक्रिया और क्षैतिज आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करें – धीरेंद्र प्रताप

राजा आंदोलनकारियों ने किया सचिवालय पर प्रदर्शन 

देहरादून। उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, महासचिव रामलाल खंडूरी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप के नेतृत्व में गुरुवार को राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड सचिवालय पर जबरदस्त प्रदर्शन और सत्याग्रह किया। आंदोलनकारियों ने सरकार पर चीनीकरण, 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण और पुलिस भर्ती में चिन्हित आंदोलनकारी बच्चों को नौकरी न दिए जाने के विरोध में गगनभेदी नारे लगाए।

इस मौके पर धीरेंद्र प्रताप और जगमोहन सिंह नेगी ने राज्य सरकार से मांग की कि वह जल्द से जल्द क्षैतिज आरक्षण लागू करे और चिन्हित आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में समाहित करे। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के आश्वासन को तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन चिन्हिकरण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।

शाम को करीब 4:30 बजे आंदोलनकारियों का पांच सदस्यीय शिष्टमंडल गृह सचिव शैलेश बगोली से मिला। बैठक में पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप, महासचिव रामलाल खंडूरी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सचिव आनंद सिंह राणा और धामी शामिल रहे। लगभग डेढ़ घंटे चली वार्ता में गृह सचिव ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि मामला फिलहाल कानून विभाग के परीक्षण में है और जैसे ही राय प्राप्त होगी, कैबिनेट की बैठक में इसे लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती में चुने गए आंदोलनकारी बच्चों के लिए सीटें खाली रखी गई हैं और किसी को नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।

धीरेंद्र प्रताप ने सरकार से टाइम-बाउंड कार्यक्रम बनाने की मांग की और चेतावनी दी कि लापरवाही से आंदोलनकारी और सरकार के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आंदोलनकारियों ने राजस्थान के प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि वहां की तरह उत्तराखंड में भी चिन्हिकरण और आरक्षण को लागू किया जाए। गृह सचिव ने इस उदाहरण को स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी।

इस मौके पर रामलाल खंडूरी, प्रदीप कुकरेती, आनंद सिंह राणा, सुलोचना भट्ट और वीर सिंह लिंगवाल समेत कई नेताओं ने आंदोलनकारियों को संबोधित किया और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर जोर दिया। सचिवालय परिसर में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर आंदोलनकारियों की मांगों को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

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