लक्सर विकास समिति ने बाढ़ पीड़ितों पर बिजली सरचार्ज का विरोध किया

देहरादून। 2025 की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित किसानों व ग्रामीणों पर बिजली बिलों के सरचार्ज के खिलाफ लक्सर विकास समिति का कड़ा विरोध
लक्सर विकास समिति के संस्थापक रविन्द्र सिंह आनंद ने वर्ष 2025 की भीषण बाढ़ से त्रस्त लक्सर क्षेत्र एवं आसपास के सैकड़ों गाँवों के किसानों व ग्रामीणों पर लगाए जा रहे बिजली बिलों के सरचार्ज, विलंब शुल्क एवं अतिरिक्त अधिभार को लेकर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। इससे संबंधित एक ज्ञापन उन्होंने आज प्रबंध निदेशक उत्तरांचल पावर कॉरपोरेशन को ज्ञापित किया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की त्रासदी के बाद आज भी क्षेत्र के किसान और ग्रामीण अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। फसलें नष्ट हो चुकी हैं, रोज़गार छिन चुका है, घर उजड़ गए हैं और आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। ऐसे हालात में ऊर्जा विभाग द्वारा बिजली बिलों में सरचार्ज और लेट फीस लगाना अमानवीय, असंवेदनशील और अन्यायपूर्ण है।
रविन्द्र सिंह आनंद ने कहा,
“यह विडंबना है कि उत्तराखंड जैसे ऊर्जा-उत्पादक राज्य में, जहाँ से बिजली बनकर पूरे देश को रोशन किया जाता है, वहीं उसी राज्य के किसान और ग्रामीण आर्थिक अंधकार में धकेले जा रहे हैं। आपदा पीड़ितों को राहत देने के बजाय उन पर आर्थिक बोझ डालना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अब लक्सर की जनता इस अन्याय को और अधिक सहन नहीं करेगी।
लक्सर विकास समिति ने मांग की की

  • लक्सर एवं आसपास के सभी बाढ़ प्रभावित ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिलों से सरचार्ज व अधिभार तुरंत समाप्त किए जाएँ।
  • अब तक लगाए गए समस्त विलंब शुल्क (लेट फीस) को पूर्णतः माफ किया जाए।
  • अत्यंत गरीब एवं प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए।
  • बकाया बिजली बिलों के भुगतान हेतु ब्याज रहित आसान किस्तों की व्यवस्था की जाए।
    रविन्द्र सिंह आनंद ने यह भी कहा कि यदि शीघ्र ही इस विषय पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो लक्सर क्षेत्र की जनता को धरना-प्रदर्शन, आंदोलन और सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी ऊर्जा विभाग एवं शासन-प्रशासन की होगी।
    इस मौके पर प्रगति कुमार मान, दीपक निमरनिया, नवीन सिंह चौहान आदि मौजूद थे।
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