अक्सर हम शाम को घर के मंदिर में दीया जलाते समय बस रुई की बत्ती उठाते हैं और उसे जला देते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि मंदिर में रखी गोल बत्ती और लंबी बत्ती का अपना अलग महत्व है? ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मानें तो बत्ती का चुनाव आपकी प्रार्थना और इच्छा पर निर्भर करता है।
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंबी बत्ती का इस्तेमाल खास तौर पर धन की देवी माँ लक्ष्मी , सरस्वती और कुलदेवी की पूजा में किया जाता है। मान्यता है कि लंबी बत्ती जलाने से वंश की वृद्धि होती है और घर में सुख-संपत्ति का विस्तार होता है।
लंबी बत्ती का महत्व
- शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके लंबी बत्ती का दीया जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
- अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो मां लक्ष्मी के सामने लंबी बत्ती जलाना शुभ माना जाता है।
गोल बत्ती है शांति और स्थिरता का आधार
गोल बत्ती, जिसे ‘फूल बत्ती’ भी कहा जाता है, इसका उपयोग मुख्य रूप से भगवान शिव (Lord Shiva), विष्णु, हनुमान जी और अन्य देवों की नियमित पूजा में होता है। इसे स्थिरता और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है।
कहां और क्यों जलाएं फूल बत्ती?
- अगर घर में कलह रहती है, तो गोल बत्ती का दीया जलाना घर के माहौल को शांत और सकारात्मक बनाता है।
- अक्सर अखंड दीपों में या दैनिक आरती में गोल बत्ती का प्रयोग किया जाता है ताकि मन में ईश्वर के प्रति आस्था स्थिर रहे।
दिशाओं का रखें खास ख्याल
दीया जलाते समय सिर्फ बत्ती ही नहीं, उसकी दिशा भी बहुत मायने रखती है। शास्त्रों के अनुसार:
उत्तर दिशा: इस दिशा में दीया जलाने से स्वास्थ्य लाभ और ज्ञान मिलता है।
पूर्व दिशा : आयु में वृद्धि और आरोग्य के लिए पूर्व की ओर मुख करके दीया जलाएं।
पश्चिम दिशा: इस दिशा की ओर लौ रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
शास्त्र कहते हैं कि चाहे बत्ती गोल हो या लंबी, अगर उसे पूरी श्रद्धा और स्वच्छता के साथ जलाया जाए, तो वह ईश्वर तक आपकी प्रार्थना जरूर पहुंचाती है। बस ध्यान रखें कि खंडित दीपक का प्रयोग न करें और दीपक जलाने के बाद उसके नीचे थोड़े अक्षत (चावल) जरूर रखें।
अस्वीकरण (Disclaimer)
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