‘एक ही दिन में दो तरह के अखबार छाप कर किया था फर्जीवाड़ा, मात्र 50 हजार जुर्माने में रफा-दफा हुआ था मामला’
देहरादून/विकासनगर: जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2017-18 के करीब 2.25 करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले की विजिलेंस जांच कराने की मांग को लेकर शासन स्तर पर जोरदार हलचल तेज कर दी है। नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात कर इस मामले में गहन जांच की मांग रखी, जिस पर मुख्य सचिव ने सचिव लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
नेगी ने बताया कि यह मामला विकासनगर क्षेत्र के आठ निर्माण कार्यों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली नेता के निर्देशन में ठेकेदारों ने अधिकारियों और एक समाचार एजेंसी को मिलाकर सरकार को चूना लगाया। उनके अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में इतना दिलचस्प खेल खेला गया कि एक ही दिन में एक ही समाचार पत्र के दो अलग-अलग संस्करण छापे गए—एक में टेंडर प्रकाशित किया गया, जबकि दूसरे में नहीं। इस साजिश के तहत टेंडर मात्र आधा फीसदी (0.5%) से भी कम दर पर स्वीकृत कर लिए गए, जबकि यदि टेंडर सही ढंग से प्रकाशित होते तो 25 से 35 प्रतिशत तक की बोली दर पर ठेके आवंटित होते।
मोर्चा अध्यक्ष ने बताया कि इस घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए वह पिछले सात से आठ साल से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले भी कई स्तरों पर जांच की सिफारिशें हो चुकी हैं। मुख्य सूचना आयुक्त ने 8 फरवरी 2018 को, मुख्य सचिव ने 10 जनवरी 2018 और 17 मई 2018 को, मुख्यमंत्री ने 3 नवंबर 2022 को तथा सतर्कता विभाग ने 17 जून 2020 को जांच कराने की सिफारिश की थी। बावजूद इसके, आरोपित नेता के दबाव और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस पूरे प्रकरण को मात्र 50,948 रुपये के जुर्माने में रफा-दफा कर दिया गया।
“नेता के निर्देशन में ही इन निर्माण कार्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया, ताकि उनके करीबी ठेकेदारों को आसानी से ठेका मिल सके। यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत का सबसे बड़ा उदाहरण है,” नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा।
नेगी ने स्पष्ट किया कि मोर्चा इस घोटाले में शामिल जालसाजों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब तक की गई सिफारिशों को दरकिनार कर मामले को दबाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जाएगी। मुख्य सचिव द्वारा लोक निर्माण विभाग के सचिव को दिए गए कार्रवाई के निर्देशों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिरकार इस पुराने घोटाले की विजिलेंस जांच हो पाती है या फिर एक बार फिर फाइलें अलमारियों में धूल फांकती रहती हैं।

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