जनवरी में देशभर में ज्ञापन अभियान शुरू, फरवरी में दिल्ली में विशाल धरना
नई दिल्ली। देशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां जल्द ही अपने अधिकारों की लड़ाई के नए दौर में प्रवेश करने जा रही हैं। रविवार को होटल रॉयल, करोल बाग, नई दिल्ली में ऑल इंडिया आंगनवाड़ी एम्प्लॉयीज़ फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित हुई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों प्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में संगठन की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से पुनर्गठन किया गया और आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रभावती सिंह ने की और संचालन राष्ट्रीय महासचिव सावित्री चौधरी ने किया। फेडरेशन की नई टीम में आसमीन खातून को राष्ट्रीय प्रवक्ता, मो. यामीन अंसारी को मुख्य राष्ट्रीय संयोजक, बालमुकुंद सिंहा को राष्ट्रीय संयोजक, रंजना राणा को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और प्रभावती सिंह को राष्ट्रीय सचिव चुना गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशीला खत्री ने नई टीम का स्वागत करते हुए कहा कि फेडरेशन को अब अनुभवी, संघर्षशील और ईमानदार नेतृत्व मिला है जो देशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की आवाज़ को बुलंद करेगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं को धरातल पर लागू करने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन आज भी उन्हें वेतन के नाम पर अत्यंत अल्प मानदेय दिया जा रहा है।
खत्री ने कहा, “यह स्थिति न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि अमानवीय भी है। सरकारें वर्षों से उनके योगदान को नजरअंदाज करती रही हैं। अब समय है कि उन्हें न्यायोचित दर्जा और सम्मान दिलाने के लिए निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाए।”
उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कार्यकत्रियों को 24,800 रुपये और सहायिकाओं को 20,000 रुपये वेतन देने को न्यायसंगत ठहराया गया था। खत्री ने कहा कि अदालत के निर्देशों के बावजूद कई राज्यों द्वारा आदेशों को न मानना आंगनबाड़ी कर्मियों के प्रति घोर असंवेदनशीलता दर्शाता है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि लंबित मांगों के समाधान के लिए देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत 12 जनवरी 2026 को देश के हर ज़िले में जिलाधिकारियों को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
अगर इसके बाद भी सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 17 फरवरी 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय स्तर का विशाल धरना और जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से हजारों की संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं भाग लेंगी।
मुख्य संयोजक मो. यामीन अंसारी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां जितनी मेहनत करती हैं, उतना कार्य कई सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी भी नहीं करते, फिर भी उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है, जो घोर अन्याय है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कानूनी रूप से सशक्त दिशा देने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।
राष्ट्रीय प्रवक्ता आसमीन खातून ने कहा कि फेडरेशन की छह सूत्रीय मांगों में वेतन वृद्धि, सरकारी सेवा का दर्जा, स्थायीकरण, बीमा सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ और फेस कैप्चर प्रणाली की समाप्ति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगठन अब निर्णायक और उग्र आंदोलन के लिए तैयार है और इसके लिए देशभर में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा।
राष्ट्रीय संयोजक बालमुकुंद सिंहा ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई फेस कैप्चर प्रणाली को तत्काल समाप्त किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि यह प्रणाली कार्यकत्रियों के कामकाज की वास्तविकता को नहीं दर्शाती और उनके श्रम का अपमान है। रंजना राणा, रुक्मणी यादव, रानी सिंह, ललितेश शर्मा, अंजली गर्ग, सीमा देवी और मुस्ताक खान सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संगठन की एकजुटता और संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशीला खत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की प्रमुख समस्याओं और मांगों का ज्ञापन सौंपा।बैठक में देशभर से सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन अब सम्मान, उचित वेतन और अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष का स्वरूप लेगा।

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