देहरादून: प्रदेश की धामी सरकार आज नवरात्र के पवित्र अवसर पर एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक दांव खेलने जा रही है। लंबे इंतजार और मुहूर्त की तलाश के बाद आखिरकार शुक्रवार सुबह 10 बजे लोकभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) पांच नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इसी के साथ लंबे समय से रिक्त चल रहे धामी मंत्रिमंडल के पांच पदों को भर दिया जाएगा।
सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए हर वर्ग और क्षेत्र को साधने की कवायद में जुटी है। इसी कड़ी में पार्टी ने विधायकों के पिछले चार सालों के कामकाज और जनता के बीच उनकी पकड़ को परखने के बाद इन नामों पर मुहर लगाई है। यह फैसला सिर्फ सरकार में विस्तार नहीं, बल्कि पार्टी संगठन को मजबूती देने और चुनावी रणनीति के तहत एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
उत्तराखंड की 70 सीटों वाली विधानसभा में क्षेत्रीय संतुलन हमेशा से किसी भी सरकार की प्राथमिकता रही है। मौजूदा समय में सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल (गढ़वाल क्षेत्र) तथा रेखा आर्य और सौरभ बहुगुणा (कुमाऊं क्षेत्र) के इस्तीफे के बाद ये पद खाली हुए थे। अब इन रिक्त सीटों पर क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए नई टीम तैयार की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और सूत्रों के मुताबिक, उन पांच नामों पर फाइनल मुहर लग चुकी है, जो कल सरकार का हिस्सा होंगे। इनमें क्षेत्रीय विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है:
- राजपुर (देहरादून) से विधायक खजानदास: देहरादून जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले दास के नाम पर मुहर लगभग तय मानी जा रही है।
- नैनीताल से सरिता आर्य: कुमाऊं क्षेत्र की महिला चेहरे के तौर पर सरिता आर्य को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
- रुड़की (हरिद्वार) से प्रदीप बत्रा: मैदानी क्षेत्र और हरिद्वार जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले बत्रा मंत्रिमंडल में नए चेहरे होंगे।
- देवप्रयाग (रुद्रप्रयाग) से विनोद कंडारी: गढ़वाल क्षेत्र के पर्वतीय इलाके से कंडारी को शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन साधा जा रहा है।
- रामनगर (नैनीताल) से दीवान सिंह बिष्ट: कुमाऊं के तराई क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले बिष्ट भी सरकार में शामिल हो सकते हैं।
खबर यह भी है कि सिर्फ मंत्रिमंडल का विस्तार ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में प्रदेश भाजपा दर्जनभर से अधिक नेताओं को विभिन्न निगमों, बोर्ड और आयोगों की जिम्मेदारी दे सकती है। चुनावी साल को देखते हुए पार्टी हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर समुदाय के दिग्गजों को साधने की कोशिश में जुटी है, ताकि संगठन और सरकार दोनों को एकसाथ लेकर चलने का स्पष्ट संदेश जनता तक पहुंचाया जा सके। अब सबकी निगाहें सुबह 10 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।

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