फैसला आने से पहले गणेश जोशी ने कैसे बता दिया नतीजा ? कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा न्यायालय के फैसले से पहले ही कथित तौर पर अपने पक्ष में निर्णय आने का दावा किए जाने को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मामला किसी व्यक्ति विशेष के राजनीतिक विरोध का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा है।

प्रेस वार्ता में कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष सुजाता पॉल, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल तथा अधिवक्ता एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि CRLR/344/2025, Vikesh Singh Negi Versus State of Uttarakhand मामले में 8 सितंबर 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट में बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित किया गया था। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इसके बावजूद 11 सितंबर को मंत्री गणेश जोशी ने मीडिया के समक्ष उनके विरुद्ध दाखिल याचिका खारिज होने का दावा किया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इसके बाद 15 सितंबर को जारी न्यायालय के आदेश में दर्ज किया गया कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण जिस पीठ ने मामले की सुनवाई की थी, उसके द्वारा निर्णय किया जाना उचित नहीं होगा तथा मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखे जाने के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब न्यायालय की ओर से फैसला सार्वजनिक रूप से सुनाया ही नहीं गया था, तब 11 सितंबर को कथित तौर पर उसके परिणाम की जानकारी कैसे सामने आई।

सुजाता पॉल ने कहा कि यह केवल गणेश जोशी का व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या सत्ता में बैठे किसी व्यक्ति को न्यायालय का निर्णय आने से पहले उसके परिणाम की घोषणा करने का अधिकार है। उन्होंने मुख्यमंत्री से गणेश जोशी को मंत्री पद से हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि सेना में सेवा के दौरान संविधान की सर्वोच्चता और संस्थागत अनुशासन को सर्वोपरि माना गया। ऐसे में किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा न्यायालय के निर्णय से पहले उसके परिणाम की घोषणा किए जाने का आरोप सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

अधिवक्ता एवं कांग्रेस प्रवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि 8 सितंबर को बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित था और 11 सितंबर को मंत्री द्वारा अपने पक्ष में फैसला आने का दावा किया गया, जबकि 15 सितंबर के आदेश में मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रही, बल्कि यह जानना चाहती है कि फैसला आने से पहले उसकी जानकारी किसे और कैसे मिली।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि 11 सितंबर को दिए गए कथित बयान और उसके आधार की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि न्यायालय का निर्णय सुनाए जाने से पहले मंत्री को कथित निर्णय की जानकारी कैसे प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यदि जांच में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने, गोपनीय न्यायिक जानकारी हासिल करने अथवा किसी अन्य गंभीर अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संवैधानिक मर्यादाओं के मद्देनजर गणेश जोशी को मंत्री पद से हटाने अथवा जांच पूरी होने तक उनके मंत्री पद पर बने रहने की उपयुक्तता पर निर्णय लेने की मांग भी की गई। कांग्रेस नेताओं ने गणेश जोशी की विधायक पद की सदस्यता के संबंध में भी सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी से कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की मांग रखी।

प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय और संबंधित संवैधानिक प्राधिकारियों को भेजी जानी चाहिए। नेताओं ने कहा –  “न्यायालय का फैसला न्यायालय ही सुनाएगा, कोई मंत्री नहीं। संविधान सर्वोच्च है, सत्ता नहीं।”

प्रेस वार्ता में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सुजाता पॉल और अधिवक्ता एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री मौजूद रहे।

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