
रुद्रप्रयाग/रामनगर। उत्तराखंड का धार्मिक पर्यटन इस वर्ष नए आयाम स्थापित करता नजर आ रहा है। एक ओर विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में शामिल तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से बंद गर्जिया देवी मंदिर के दोबारा खुलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। इन दोनों घटनाक्रमों ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय कारोबारियों में उत्साह का माहौल बना दिया है।
समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम में इस यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद अब तक 1,18,381 श्रद्धालु भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक माना जा रहा है और इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के पर्वतीय धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
धाम प्रबंधन के अनुसार, दर्शन करने वालों में 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी नागरिक शामिल हैं। हालांकि इन आंकड़ों में वे पर्यटक शामिल नहीं हैं, जो चोपता से सीधे चंद्रशिला ट्रैक की ओर रवाना हुए।
तुंगनाथ यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिला है। चोपता, बणियाकुंड और दुगलबिट्टा जैसे क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, भोजनालय और घोड़ा-खच्चर संचालन से जुड़े लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का और बेहतर विकास किया जाए, तो तुंगनाथ धाम अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों में अपनी पहचान बना सकता है।
इधर, नैनीताल जिले के रामनगर स्थित प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर से भी श्रद्धालुओं के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। मंदिर परिसर के मुख्य टीले को सुरक्षित बनाने के लिए चल रहे निर्माण कार्य के कारण मंदिर को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। लेकिन मानसून के चलते निर्माण कार्य रोकना पड़ा है, जिसके बाद मंदिर को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन ने उपजिलाधिकारी रामनगर को पत्र भेजकर सुझाव दिया है कि यदि प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ले, तो 5 जुलाई से मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय जिला प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2010 की बाढ़ के बाद गर्जिया मंदिर के टीले में आई दरारों को देखते हुए लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। परियोजना का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अब मानसून समाप्त होने के बाद अक्टूबर में फिर से शुरू किया जाएगा। तब तक श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोले जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस तरह उत्तराखंड के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों से आई ये सकारात्मक खबरें न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आई हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी शुभ संकेत मानी जा रही हैं।

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