

देहरादून। रक्षाबंधन का त्योहार अब सिर्फ राखी, मिठाई और कूरियर से भेजे गए तोहफों तक सीमित नहीं रहा। भागदौड़ भरी जिंदगी में जब भाई-बहन का साथ बैठकर बात करना भी मुश्किल हो गया है, तो इस बार कैलेंडर ने एक सुनहरा मौका दिया है। इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को पड़ रहा है, जिससे तीन दिन का लॉन्ग वीकेंड बन रहा है। ऐसे में कई लोग परंपरागत उपहारों की जगह एक साथ छोटी यात्रा को बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए यात्रा के शौकीन भाई-बहनों के लिए कुछ खास रूट्स पर फोकस किया जा रहा है। इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बस सेवा न्यूगो इन रूट्स पर संचालन करती है, जिससे सफर आरामदायक और ट्रैफिक की चिंता से मुक्त बताया जा रहा है।
फूडी भाई-बहनों के लिए दिल्ली से जयपुर का रूट एक बेहतरीन विकल्प है। पिंक सिटी में राजस्थानी थाली से लेकर रूफटॉप कैफे तक का अनुभव मिलता है, जबकि आमेर किले का नजारा शाम को और खास बना देता है। वहीं समुद्र और सुकून पसंद करने वालों के लिए चेन्नई से पांडिचेरी की दूरी कम होने के कारण यह एक स्पॉन्टेनियस वीकेंड ट्रिप बन सकती है। फ्रेंच क्वार्टर की पीली दीवारें और शांत प्रोमेनेड पर कॉफी के साथ बिताया समय इस सफर को यादगार बना देता है।
अध्यात्म और शांति चाहने वालों के लिए दो विकल्प सामने आते हैं – बेंगलुरु से तिरुपति और भोपाल से उज्जैन। तिरुमला मंदिर के दर्शन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा को न सिर्फ धार्मिक बल्कि मानसिक थकावट से ब्रेक के तौर पर देखा जा रहा है।
जिन्हें भीड़-भाड़ से दूर सिर्फ एक ब्रेक चाहिए, उनके लिए दिल्ली से देहरादून का रास्ता सबसे उपयुक्त है। रॉबर्स केव में पैर डालकर सुबह बिताना, एफआरआई और मालसी डियर पार्क में टहलना, इस ट्रिप को किसी टूरिस्ट शेड्यूल से ज्यादा एक रीसेट बटन जैसा बनाता है।
कल्चर एक्सप्लोर करने वाले भाई-बहनों के लिए हैदराबाद से विजयवाड़ा का विकल्प है, जहां इतिहास, खान-पान और धार्मिक स्थलों का संगम बिना ज्यादा भीड़ के मिल जाता है। और जिनके लिए मंजिल से ज्यादा सफर मायने रखता है, उनके लिए बेंगलुरु से पांडिचेरी का लंबा कोस्टल रूट है, जहां घंटों की बातें और साझा म्यूजिक प्लेलिस्ट ही पूरी ट्रिप बन जाती है।
कुल मिलाकर इस बार रक्षाबंधन का संदेश यही है कि कोई रैप किया हुआ तोहफा नहीं, बल्कि बिना जल्दबाजी के साथ बिताए गए कुछ दिन ही सबसे बड़ा उपहार साबित हो सकते हैं।

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