मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्य नीतियों का आधार बने : अमित शाह, गीता प्रेस व ‘कल्याण’ को श्रद्धांजलि

देहरादून / ऋषिकेश। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को नीतियों के मूल में समाहित कर देश को नई दिशा दी जा रही है। गीता प्रेस के संस्थापक पंडित हनुमान प्रसाद पोद्दार जी (जिन्हें भाई जी के नाम से जाना जाता है) और उनकी ‘कल्याण’ पत्रिका के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अंग्रेजी शासनकाल के उस दौर को याद किया, जब धर्म को अंधविश्वास ठहराना फैशन बन चुका था। श्री शाह ने कहा, “उस समय पोद्दार जी ने आक्रामक भाषा का सहारा लिए बिना ज्ञान का दीपक जलाया। ‘कल्याण’ का उद्देश्य केवल लोगों का मंगल और जगत का कल्याण था।”

गीता प्रेस, गोरखपुर की यह संस्था 1923 में स्थापित हुई, जो सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अग्रणी रही। श्री शाह ने जोर देकर कहा कि ‘कल्याण’ पत्रिका में पूरे विश्व कल्याण की भावना समाहित है। उन्होंने पोद्दार जी की तर्कशीलता की सराहना करते हुए उल्लेख किया कि विरोधियों के शोर के जवाब में उन्होंने शास्त्र और शांति का मार्ग अपनाया। “सनातन की रक्षा शोर से नहीं, शास्त्र और तर्क से होती है। गीता प्रेस ने कभी प्रचार या धन के लिए विज्ञापन नहीं दिए, क्योंकि यह व्यक्ति-केंद्रित नहीं, विचार-केंद्रित थी,” श्री शाह ने कहा। उन्होंने ‘कल्याण’ के दर्शन को दोहराया कि सभ्यताएं तलवार से नहीं, शब्दों और सत्य-सत्व युक्त ज्ञान से बनती हैं।

महात्मा गांधी का प्रसंग भी जोड़ा गया। श्री शाह ने बताया कि ‘कल्याण’ प्रारंभ होने पर बापू ने निर्देश दिया था, “कभी विज्ञापन मत छापना।” आज 100 वर्ष बाद भी पत्रिका विज्ञापन-मुक्त है। “आध्यात्मिक ग्रंथ बाजार के दबाव से ऊपर रहें,” उन्होंने सलाह दी। गीता प्रेस ने भक्ति साहित्य, पुराण, रामायण-महाभारत की व्याख्याएं और संतों के जीवन वृत्तांत प्रकाशित कर करोड़ों लोगों तक सनातन चेतना पहुंचाई। इसके फलस्वरूप आज युवा पीढ़ी में सनातन धर्म के प्रति आकर्षण बढ़ा है।

श्री शाह ने पीएम मोदी के 11 वर्षीय कार्यकाल को सांस्कृतिक पुनरुत्थान का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने युवाओं में आए गुणात्मक परिवर्तन पर संतोष जताया। प्रमुख उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “550 वर्षों बाद अयोध्या में रामलला का गगनचुंबी मंदिर खड़ा हो चुका। औरंगजेब द्वारा ध्वस्त काशी विश्वनाथ कॉरिडोर विश्व को संदेश देता है कि श्रद्धा तोड़ने वालों से कहीं बड़ी है।” सोमनाथ मंदिर को 16 बार तोड़ा गया (महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी आदि द्वारा), लेकिन 16 बार पुनर्निर्मित हुआ। “तोड़े वाले लुप्त हो गए, सनातन ध्वजा लहरा रही है। भारत सरकार 1000 वर्ष पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष’ मना रही है।”

अन्य उपलब्धियां: कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटना, महाकालेश्वर कॉरिडोर, केदारनाथ पुनरुद्धार, बद्रीनाथ मार्ग विकास। देशभर में 35 से अधिक तीर्थों का महिमामंडन। मातृभाषा शिक्षा को बढ़ावा, जहां अब विरोध नहीं। “पीएम मोदी विश्व मंच पर हिंदी बोलते हैं, तो राष्ट्र का सीना चौड़ा हो जाता है,” श्री शाह ने कहा। विदेशों से 642+ प्राचीन मूर्तियां पुनःस्थापित। अंत में, शाह ने कहा कि करोड़ों संतों ने विकट समय में धर्म, सत्व और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और गीता प्रेस और कल्याण जैसी पत्रिकाओं ने सनातन की लौ को हमेशा बचाकर रखा है।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments