हिमालय की संवेदनशीलता समझना समय की मांग

देहरादून  ।  ग्राफिक एरा में विशेषज्ञों ने पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित और संतुलित विकास के उपाय सुझाए।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज पहाड़ी क्षेत्र में भारतीय मानकों के अनुरूप इंजीनियरिंग विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में अस्थिर पर्यावरण, बदलते जलवायु हालात और सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां प्रमुख है। शैक्षणिक संस्थान होने के नाते, हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन चुनौतियों के समाधान खोजें और युवाओं को सुरक्षित और संतुलित पर्वतीय विकास की दिशा में शिक्षित करें।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड देहरादून के निदेशक श्री सौरभ तिवारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का विकास मैदानी क्षेत्र जितना ही महत्वपूर्ण है। हाल की प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को समझना समय की आवश्यकता बन गया है। निर्माण कार्यों में मानकों का पालन इन चुनौतियों से निपटने में सहायक हो सकता है।

विशेषज्ञ, डॉ अनबलगन रथिनम हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय अस्थिरताओं, अधिक वर्षा, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यदि ये कार्य भूमि की वास्तविक स्थिति को समझे बिना किए जाएं, तो इससे पहाड़ी अस्थिरता बढ़ती है और भूस्खलन जैसी गंभीर समस्याएं और गंभीर रूप लेती हैं।

इस सेमिनार में 100 से अधिक सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिम ढलान स्थिरता मॉडलिंग, भूस्खलन पूर्व चेतावानी प्रणाली,  साइड जांच तकनीक, बदलते जलवायु परिदृश्य में हिमालय आपदाएं तथा पहाड़ी खुदाई में जियोसिंथेटिक जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस सेमिनार का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड ने संयुक्त रूप से किया कार्यक्रम में नाक्कला प्रवीण साईं, इंजीनियर मिनिमोल कोरुल्ला, बीआईएस नोडल ऑफिसर डॉ बृजेश प्रसाद समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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