यूपीईएस स्कूल ऑफ़ डिजाइन छात्रों की वैश्विक उड़ान, फिल्मों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में 253 मान्यताएं बटोरीं

देहरादून।  यूपीईएस, भारत की एक प्रमुख मल्टीडिसिप्लिनरी और रिसर्च यूनिवर्सिटी, यह घोषणा करते हुए प्रसन्न है कि इसके स्कूल ऑफ डिजाइन यानी एसओडी के छात्रों की फिल्मों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में कुल 253 मान्यताएं हासिल की हैं। इनमें 185 फेस्टिवल सेलेक्शन्स, 39 नॉमिनेशन्स, 25 अवॉर्ड्स और 9 स्पेशल मेंशन्स शामिल हैं। यह उपलब्धि एसओडी के डिजाइन छात्रों की क्रिएटिविटी की व्यापकता और गहराई को दर्शाती है, जो अपनी इनोवेटिव और रिसर्च-बेस्ड अप्रोच के साथ प्रभावशाली कहानियां कहने के लिए फिल्मों को एक क्रिएटिव माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इन फिल्मों को कई प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया गया है, जिनमें बेंगलुरु इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल यानी बीआईएसएफएफ, जो एक ऑस्कर-क्वालिफाइंग फेस्टिवल है; वर्ल्ड फेस्टिवल ऑफ एनिमेटेड फिल्म 2025, वार्ना, बुल्गारिया; इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ फैमिली एंड चिल्ड्रन्स फिल्म्स, मॉस्को; शिबुया तानपेन फिल्म फेस्टिवल, जापान; लिफ्ट-ऑफ ग्लोबल नेटवर्क एट पाइनवुड स्टूडियोज़, यूके; कुआलालंपुर इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड्स; चियांग माई फैंटास्टिक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, थाईलैंड; और नेवार्क इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सहित अन्य शामिल हैं।

सस्टेनेबिलिटी, सोशल अवेयरनेस, कल्चर और हेरिटेज, मेंटल हेल्थ, माइथोलॉजी, डॉक्यूमेंट्री स्टोरीटेलिंग, फिक्शन और एक्सपेरिमेंटल एनिमेशन जैसे विषयों पर आधारित ये फिल्में स्कूल के डिजाइन एजुकेशन के दृष्टिकोण को दिखाती हैं। इसमें छात्र डिजाइन थिंकिंग, रिसर्च, स्टोरीटेलिंग और टेक्निकल स्किल्स को क्रिएटिव एक्सपेरिमेंटेशन के साथ जोड़ते हैं। एसओडी ट्रांसडिसिप्लिनरी लर्निंग के साथ-साथ एआर/वीआर और एआई जैसी उभरती टेक्नोलॉजीज़ को भी शामिल करता है, ताकि छात्र प्रासंगिक और फ्यूचर-रेडी क्रिएटिव समाधान विकसित कर सकें। स्कूल छात्रों को ऐसे प्रभावशाली और फ्यूचर-रेडी समाधान बनाने के लिए भी सशक्त करता है, जो सांस्कृतिक विरासतों को संरक्षित करें, परंपरा को आधुनिकता से जोड़ें, और समाज तथा सामाजिक-आर्थिक विकास में सार्थक योगदान दें।

सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली फिल्मों में ‘वेयर द स्टार्स रेस्ट’ शामिल है, जिसे वेदांग नाग ने बनाया है और जिसने 70 मान्यताएं हासिल की हैं — इनमें 56 सेलेक्शन्स, 9 नॉमिनेशन्स, 4 जीत और एक स्पेशल मेंशन शामिल है। इस फिल्म ने 36 अंतरराष्ट्रीय सेलेक्शन्स भी हासिल किए हैं, जो सभी प्रोजेक्ट्स में सबसे अधिक हैं। ‘सेव द हिमालयाज़’, जिसे हर्ष रावत और मयंक मोरखड़े ने बनाया है, को 35 मान्यताएं मिली हैं। इसके बाद ‘स्ट्रिंग्स’, जिसे धुर्वित शाह, नेहा गणेश कुंबर और टीम ने बनाया है, को 25; ‘अ शू स्टोरी’, जिसे अदिति गोयल ने बनाया है, को 20; और ‘इकोज़ ऑफ डुगोंग’, जिसे निताई गंधार, सौम्या किरण देवा और टीम ने बनाया है, को 13 मान्यताएं मिली हैं। इन पांच प्रोजेक्ट्स ने मिलकर कुल 163 मान्यताएं हासिल की हैं।

इन कहानियों ने छात्रों की इस क्षमता को दिखाया कि वे जटिल विचारों को आकर्षक विजुअल नैरेटिव्स में बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए, ‘इकोज़ ऑफ डुगोंग’ अंडमान के समुद्री जल में मरीन लाइफ पर मानव दखल के प्रभाव को एक्सप्लोर करती है, जबकि ‘वेयर द स्टार्स रेस्ट’ एक छोटे लड़के की यात्रा के माध्यम से दुख और स्वीकार्यता को समझती है। ‘अ शू स्टोरी’, एक 2डी एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म है, जो हास्य और playful विजुअल भाषा के जरिए न्याय, समानता और अनदेखे योगदानों के महत्व को एक्सप्लोर करती है।

स्कूल ऑफ डिजाइन के छात्रों को मिल रही बढ़ती मान्यता पर प्रो. भास्कर भट्ट, डीन, स्कूल ऑफ डिजाइन, ने कहा, “यूपीईएस स्कूल ऑफ डिजाइन में हमारा फोकस क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने पर है, साथ ही छात्रों को प्रयोग करने और अपनी कला की सीमाओं को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता देने पर भी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में उनके काम को मान्यता मिलना इस बात का प्रमाण है कि वे विचारों को ऐसी कहानियों में बदलने की क्षमता रखते हैं, जो क्लासरूम से आगे दर्शकों से जुड़ती हैं।”

डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस, ने कहा, “शिक्षा तब सबसे अधिक प्रभावशाली होती है जब छात्र अपने विचारों को ऐसे काम में बदल पाते हैं, जो क्लासरूम से बाहर सार्थक प्रभाव पैदा करे। प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल्स में हमारे स्कूल ऑफ डिजाइन के छात्रों को मिली मान्यता उनकी क्रिएटिव और टेक्निकल क्षमताओं और समकालीन दर्शकों से जुड़ने वाली कहानियां कहने की क्षमता को दर्शाती है। यह हमारे एक्सपीरिएंशियल और इंडस्ट्री-रेलेवेंट लर्निंग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो छात्रों को सृजन करने, इनोवेट करने और दुनिया में प्रभाव पैदा करने के लिए तैयार करती है।”

यह सफलता यूपीईएस के एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर और डिजाइन छात्रों को बदलती डिजाइन और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ के लिए आवश्यक क्रिएटिव, टेक्निकल और प्रॉब्लम-सॉल्विंग क्षमताओं से लैस करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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