उत्तराखंड ठगों का सुरक्षित गढ़ बनता जा रहा है’-धस्माना

दून समृद्धि ग्रुप की 50 करोड़ की ठगी

देहरादून । राज्यभर में चर्चित हो रहे दून समृद्धि ग्रुप ऑफ कंपनीज के पचास करोड़ रुपये के ठगी प्रकरण ने एक बार फिर उत्तराखंड में वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस बहुचर्चित ठगी के शिकार महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना से मुलाकात की और विस्तार से अपनी पीड़ा साझा की।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि यह ठगी दून समृद्धि ग्रुप ऑफ कंपनीज के नाम से की गई है, जिसकी स्थापना एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक जगमोहन चौहान ने की थी। उन्होंने यह कंपनी अपनी पत्नी नीलम चौहान के नाम से पंजीकृत करवाई थी, जिसमें नीलम प्रबंध निदेशक और उनकी पुत्री आशा चौहान निदेशक के पद पर हैं। बताया गया कि यह परिवार अब फरार है और कंपनी के खाताधारकों से संपर्क नहीं किया जा रहा।

ठगी का जाल देहरादून से लेकर विकासनगर, भानियावाला, रानीपोखरी, टिहरी, चंबा, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी तक फैला हुआ था। कंपनी ने सैकड़ों एजेंट नियुक्त किए, जिन्होंने विभिन्न निवेश योजनाओं के नाम पर करीब 16,000 खाताधारकों से 50 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि एकत्र की। एजेंटों और निवेशकों के अनुसार, मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी पैसे लौटाए नहीं गए, और विरोध करने वालों को टरकाया गया। अब कंपनी के दफ्तर बंद हैं और चौहान परिवार फरार बताया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस घोटाले को “एल्यूसेसी घोटाले के बाद प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा वित्तीय अपराध” करार दिया। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड आज ठगों, नकल माफियाओं, भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। पुलिस और प्रशासनिक तंत्र अपराधियों से भयमुक्त दिखाई दे रहा है, जो प्रदेश की गंभीर प्रशासनिक चिंता है।”

धस्माना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही राज्य के मुख्य सचिव से मुलाकात कर इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेगी ताकि प्रभावित लोगों को न्याय मिल सके।

उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से कहा कि यदि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति आम जनता के विश्वास को पूरी तरह खत्म कर देगी।
साथ ही उन्होंने पीड़ित महिलाओं को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस हर स्तर पर उनके साथ खड़ी रहेगी और ठगों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

यह मामला उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रही चिटफंड और निवेश ठगी की घटनाओं पर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।

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