तीन वर्षों में 4440 तस्कर गिरफ्तार, 208 करोड़ की नशीली सामग्री जब्त
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत नशे के सौदागरों पर करारी चोट करते हुए राज्य में ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक अभियान छेड़ रखा है। विगत तीन वर्षों में अगस्त 2025 तक 3431 मामलों में 4440 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान 208 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नशीली सामग्री जब्त की गई, जिसमें चरस, डोडा, अफीम, कोकीन, हेरोइन, गांजा, गोलियां, इंजेक्शन और कैप्सूल शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, परंपरागत मादक पदार्थों की तुलना में अब एमडीएमए और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इसी के मद्देनज़र राज्य पुलिस ने निगरानी और कार्रवाई दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति को सशक्त किया है।
पिछले एक वर्ष में की गई प्रमुख कार्रवाइयों में चम्पावत और ऊधम सिंह नगर जिलों में एमडीएमए और प्रिकर्सर कैमिकल्स की जब्ती उल्लेखनीय रही। चम्पावत में एक महिला अभियुक्ता के पास से 5.688 किलोग्राम एमडीएमए बरामद हुआ, जबकि ऊधम सिंह नगर में अभियुक्त कुणाल राम कोहली से 7.41 ग्राम एमडीएमए के साथ-साथ 57.5 लीटर Dichloromethane, 20 लीटर Acetone, 47.5 लीटर HCL, 500 मिलीलीटर Methylamine और 28 किलो Sodium Hydroxide जब्त किया गया।
ड्रग्स डायवर्जन की आशंका के चलते फार्मा कंपनियों पर भी कार्रवाई तेज की गई है। देहरादून की ग्रीन हर्बल फैक्ट्री से हजारों कैप्सूल, टेबलेट और सीरप जब्त किए गए, जिनमें Tramadol और Buprenorphine जैसे प्रतिबंधित पदार्थ शामिल थे। वहीं हरिद्वार के रानीपुर क्षेत्र में एक गोदाम से 3.4 लाख नशीले कैप्सूल बरामद हुए। पूछताछ में देहरादून स्थित बायोटेक लिमिटेड के डिपो से 2.1 लाख शीशी सीरप और 6 लाख ट्रामाडोल कैप्सूल की बरामदगी हुई।
चंडीगढ़ एनसीबी की कार्रवाई में जे.आर. फार्मा कम्पनी से निर्मित 60 हजार प्रतिबंधित गोलियों के साथ 7 तस्कर गिरफ्तार हुए, जिसके बाद हरिद्वार स्थित फैक्ट्री से 2.5 लाख गोलियां जब्त की गई।
उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स के विरुद्ध यह अभियान केवल धरपकड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजागरूकता और रोकथाम को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य में ड्रग्स के नए ट्रेंड्स पर सतत निगरानी और फार्मा सेक्टर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
यह कार्रवाई न केवल राज्य में नशे के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह संकेत भी है कि उत्तराखंड पुलिस ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में पीछे हटने वाली नहीं है।

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