देहरादून। उत्तराखंड पुलिस ने ‘ड्रग फ्री देवभूमि’ मिशन के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े बड़े मामलों की कार्यवाही तेज करने का ऐलान किया है। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) कानून व्यवस्था, डॉ. वी. मुरूगेशन ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक में वाणिज्यिक मात्रा में नशा तस्करी के लंबित मामलों को दो महीने के अंदर निपटाने के सख्त निर्देश दिए।
एडीजी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सभी जिला प्रभारियों और आईजी को समझाया कि अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एक शिक्षक की तरह पूरे मामले को इन बिंदुओं में समझाया:
1. टारगेटेड एक्शन: सबसे पहले, वर्ष 2023 के 4 और वर्ष 2024 के 15 लंबित मामलों पर फोकस किया जाएगा। इन्हें एक निश्चित समय सीमा में पूरा करना ही होगा।
2. किस रेंज में कितने मामले? बैठक में खुलासा हुआ कि गढ़वाल मंडल के जिलों में 40 और कुमाऊं मंडल के जिलों में 47 वाणिज्यिक मात्रा के मामले लंबित हैं। इन सभी की गहन समीक्षा की गई।
3. जब्त होंगी अवैध संपत्तियां: ADG ने जोर देकर कहा कि गैंगस्टर एक्ट और NDPS एक्ट की धाराओं का इस्तेमाल कर अभियुक्तों की अवैध तरीके से कमाई गई संपत्तियों को जरूर कुर्क किया जाए। यह नशा माफिया को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाने वाला कदम है।
4. हरदम नजर में रहेंगे अपराधी: पेशेवर अपराधियों को PIT NDPS एक्ट के तहत नजरबंद करने और उनके खिलाफ ‘हिस्ट्री शीट’ दर्ज कर लगातार निगरानी रखने के आदेश दिए गए।
5. लापरवाह विवेचकों पर कार्रवाई: अङ्ग ने एक बड़ी कमी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अदालत के सामने अभियुक्त का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रखा गया। ऐसे लापरवाह विवेचकों (Investigating Officers) की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
6. नकली नंबर प्लेट वाले वाहन नहीं बच पाएंगे: पता चला है कि तस्करी में इस्तेमाल कई वाहनों के नंबर प्लेट गलत थे। अब विवेचकों को इंजन और चेसिस नंबर से असली मालिक का पता लगाकर कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
7. फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद भी देरी नहीं: कई मामलों में मादक पदार्थ की लैब रिपोर्ट आने के बाद भी विवेचना पूरी नहीं की गई। ऐसे अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
8. चेकलिस्ट बनेगी: हर बड़े मामले में क्षेत्राधिकारी स्तर पर एक चेक-लिस्ट तैयार की जाएगी, ताकि सभी जरूरी कार्यवाही समय पर पूरी हो सके।
9. नेटवर्क की जांच जरूरी: ADG ने नाराजगी जताई कि कई मामलों में तस्करी के पूरे नेटवर्क (आगे-पीछे के लिंक) और उसके वित्तीय स्रोतों (Financial Investigation) की जांच नहीं हो पा रही। इसके लिए जिम्मेदार विवेचकों पर कार्रवाई के साथ-साथ, बची हुई जांच कार्रवाई पूरी करने के लिए सिर्फ 2 महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा, पुलिस उपमहानिरीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल और अपराध शाखा मुख्यालय की पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस कार्रवाई से साफ है कि उत्तराखंड पुलिस अब नशा तस्करी के बड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटाकर ‘देवभूमि’ को नशे की इस गंदगी से पूरी तरह मुक्त करना चाहती है।

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