उत्तराखंड राज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन का आंदोलन तेज, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

मुख्यमंत्री आवास घेराव की दी चेतावनी, जसवतं सिंह खोलिया और पिंकेश रावत के नेतृत्व में कर्मचारी उतरे मैदान में

देहरादून। उत्तराखंड राज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन, शाखा मुख्यालय, ने आज दस सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत की। संगठन के शाखा अध्यक्ष जसवतं सिंह खोलिया और शाखा मंत्री पिंकेश रावत के नेतृत्व में राजधानी देहरादून स्थित शासकीय मुख्यालय व अन्य शाखाओं के सैकड़ों कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर सरकार और प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश प्रकट किया।

संघ ने याद दिलाया कि 06 सितंबर 2025 को प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक डालनवाला, देहरादून में आयोजित हुई थी, जिसमें सभी पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि कर्मचारियों की 10 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में जी.एस.टी के अंतर्गत विभागों से पदोन्नति, सेवा नियमावली तैयार करने, अधिशेष कर्मचारियों को समायोजित करने, राज्य कार्मिक अधिकारियों को समय पर पदोन्नति देने, परिणाम नियमावली (Forgo) से विभाग को मुक्त करने और आवास आदि से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित किया गया। लेकिन बैठक के निर्णयों के अनुरूप अब तक सरकार और विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण कर्मचारियों को आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ा है।

कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 06 सितंबर की बैठक में किए गए वादों के अनुरूप ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन तीसरे चरण में प्रवेश करेगा। तीसरे चरण के तहत 17 अक्तूबर से राज्यभर के सभी कार्यालयों में विरोध स्वरूप प्रत्येक दिन दोपहर 11 बजे से 12 बजे तक गेट मीटिंग आयोजित की जाएगी।

एसोसिएशन के नेताओं ने बताया कि वर्ष 2008, 2015 और 2024 में राज्य अधिकारियों के पुनर्गठन के दौरान तीन बार विभागीय संरचनाओं का पुनर्गठन किया गया, लेकिन उसी अनुपात में कर्मचारियों का ढांचा (cadre) पुनर्गठित नहीं किया गया। वर्ष 2024 में अधिकारियों के 16 कार्यालयों का पुनर्गठन तो मान्य हुआ, मगर 49 कार्यालयों में कर्मचारियों का पुनर्गठन अब तक स्वीकृत नहीं हो पाया।

कर्मचारियों का कहना है कि विभाग द्वारा बार-बार उपेक्षा किए जाने से कार्यभार असमान रूप से बढ़ गया है और सीमित स्टाफ पर अत्यधिक दबाव बन गया है, जिससे कर्मचारियों की मानसिक व पारिवारिक स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

मिनिस्ट्रियल स्टाफ संघ ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों का समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन व्यापक रूप धारण करेगा और उसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

शाखा अध्यक्ष जनवतं सिंह खोलिया ने कहा, “हमारी मांगें पूरी तरह जायज़ हैं। वर्षों से लंबित इस मसले को लेकर अब कर्मचारी और अधिक प्रतीक्षा नहीं करेंगे। सरकार को चाहिए कि वह कर्मचारियों के हित में तत्काल ठोस निर्णय ले।”

शाखा मंत्री पिंकेश रावत ने कहा, “यदि हमारी आवाज़ को फिर अनसुना किया गया तो आंदोलन और भी उग्र होगा। सरकार को समझना चाहिए कि कर्मचारी राज्य की रीढ़ होते हैं, उनकी समस्याओं की अनदेखी राज्यहित के विपरीत है।”

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