उत्तराखंड राज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन का तीसरे दिन भी प्रतीकात्मक विरोध

10 सूत्रीय मांगों पर सरकार से त्वरित निर्णय की मांग

देहरादून।उत्तराखंड राज्य कर मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी आंदोलन और नाराजगी तेज़ हो गई है। अपनी 10 सूत्रीय मांगों के निराकरण में सरकारी उपेक्षा के विरोध में बुधवार को तीसरे दिन भी प्रदेशभर के कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज किया गया। देहरादून मुख्यालय समेत राज्यभर की शाखाओं में यह सांकेतिक आंदोलन जारी रहा, जिसमें स्थानीय लीडरों के नेतृत्व में तमाम कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई।

आंदोलन की मुख्य वजहें
संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी एवं शाखा मंत्री पिंकेश रावत के अनुसार, विभागीय ढांचे के पुनर्गठन, समयबद्ध पदोन्नति, नई नियमावलियां, जीएसटी से जुड़े कार्यों का बोझ कम करने, और आवासीय सुविधाओं जैसी कई मांगें वर्षों से लंबित हैं। पिछले लगभग दो दशकों में तीन बार अधिकारियों के ढांचे का पुनर्गठन तो हुआ, लेकिन कर्मचारियों के धड़े का पुनर्गठन नहीं होने से लगभग 481 रिक्त पद व कार्यालयों में लगातार कार्य का दबाव बना हुआ है।

बैठक के फैसले और आगामी कार्यक्रम
6 सितंबर 2025 को हुई राज्य कर विभाग की प्रमुख बैठक, तथा उसके बाद 23 सितंबर से शुरू हुए आंदोलन के बावजूद, सरकार और प्रशासन की ओर से कोई समाधान सामने नहीं आया। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि 2006-07, 2014-15 एवं 2024-25 तक अधिकारी संर्वग का तीन बार विभागीय पुनर्गठन होने के बावजूद, सहायक आयुक्त स्तर तक के पदों की लगातार स्वीकृति तो मिली, किंतु व्यापक कर्मचारी वर्ग को नये पद या प्रमोशन का लाभ नहीं मिल पाया। इससे कई कार्यालयों में कार्य व्यवस्था और मोराल प्रभावित हो रही है।

चेतावनी और आगे की रणनीति
प्रेस नोट के अनुसार यदि शीघ्र ही मांगें नहीं मानी गईं, तो 17 अक्टूबर 2025 को सभी कार्यालयों के बाहर राज्यव्यापी विरोध स्वरूप गेट मीटिंग आयोजित की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर दीपावली के बाद पूरे राज्य में कार्य बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।

कर्मचारी नेतृत्व और मांगें
आंदोलन का नेतृत्व जगमोहन सिंह नेगी (प्रदेश अध्यक्ष), पिंकेश रावत (शाखा मंत्री) समेत अन्य प्रमुख पदाधिकारी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सभी 10 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध इसी तरह चरणबद्ध जारी रहेगा।

राज्य सरकार एवं विभागीय प्रशासन के रुख को लेकर कर्मचारियों में तीखा असंतोष है।सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों की इस व्यापक स्‍तर की नाराजगी और एकता ने राज्य सरकार पर दबाव बना दिया है, जिससे कर्मचारियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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