देहरादून। उत्तरांचल उर्दू अकादमी समिति के तत्वावधान में ‘कौमी एकता मुशायरा’ एवं ‘जश्ने अंबिका सिंह रूही’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि उर्दू समेत देश की सभी भाषाएं हिंदी की सगी बहनें हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर भारत में बोली जाने वाली हिंदुस्तानी भाषा हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी का सुंदर मिश्रण है, जिसमें विभिन्न भाषाओं के शब्दों को हटाने से इसकी खूबसूरती नष्ट हो जाएगी। इसलिए, इसकी हिफाजत हर हिंदुस्तानी का फर्ज है।
धस्माना ने आगे कहा कि हिंदी, उर्दू, गुरुमुखी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, बंगला सहित भारत की सभी भाषाएं देश की विभिन्नता में एकता की ताकत हैं। ये भाषाएं एक-दूसरे की सगी बहनें हैं और इनका फलना-फूलना भारत को और मजबूत बनाता है। उन्होंने उन लोगों को कुपढ़ या अनपढ़ करार दिया जो उर्दू को किसी एक मजहब की भाषा बताते हैं या इसे पाकिस्तान से जोड़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्दू का जन्म हिंदुस्तान में ही हुआ है और यह भारत के आधे से अधिक प्रांतों में बोली-पढ़ी जाती है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में विधायक सविता कपूर, एसपी कोचर, डॉ. मनोरमा हिम्मत सिंह, डॉ. एस. अंसारी, ब्रिगेडियर केजी बहल एवं श्री आर. बक्शी उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ शायर परमवीर कौशिक ने किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में विधायक सविता कपूर, एसपी कोचर, डॉ. मनोरमा हिम्मत सिंह, डॉ. एस. अंसारी, ब्रिगेडियर केजी बहल एवं श्री आर. बक्शी उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ शायर परमवीर कौशिक ने किया।
इस अवसर पर संयोजक वरिष्ठ शायर इनाम रम्जी, अंबिका सिंह ‘रूही’, मोनिका अरोड़ा ‘मंतशा’, तस्नीमा कौसर, जोया शेख, नदीम बरनी, रईस फिगार, शौहर जलालाबादी, शाख दूनवी, अमजद खान ‘अमजद’, आरिफ अतीब, रूबा बिजनौरी, ए.एस. शाह, कमाल तकी, डॉ. हाकिम सिंह, अरुण कुमार भट्ट, विक्रम यादव, अनूप कॉल आदि शायरों ने अपने चुनिंदा कलाम पेश कर समां बांध दिया और खूब वाहवाही लूटी। डॉ. आफताब आलम, वसीम अहमद, लल्लन भाई, फरमान अली सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी भी मौजूद रहे।

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