देहरादून। परेड मैदान में आयोजित उत्तरायणी कौथिग का भव्य समापन सांस्कृतिक उल्लास और भावनात्मक वातावरण के बीच हुआ। उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 का समापन समारोह अत्यंत भव्यता और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में तथा महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी, माननीय कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज एवं अध्यक्ष, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर सभी अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
समापन समारोह में सेवा संकल्प फाउंडेशन की संस्थापक गीता धामी के मंच पर पहुंचते ही दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी और पूरे पंडाल में उत्साह का माहौल बन गया। अपने ओजस्वी संबोधन में गीता धामी ने कहा कि आज जब हर ओर आधुनिकता की चर्चा हो रही है, तब यह और भी आवश्यक हो जाता है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को तकनीकी और आधुनिक सोच के साथ-साथ अपनी लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से भी जोड़ें। यही हमारी पहचान को जीवित रखता है और समाज को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के 13 जनपदों से आए शिल्पकारों, लोक कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने एक ही मंच पर अपनी कला और उत्पादों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लगभग 100 स्टॉलों के माध्यम से प्रतिभागियों को सरकारी बाजार उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।


गीता धामी ने चिंता जताई कि बढ़ती आधुनिकता के बीच कहीं न कहीं समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होता जा रहा है। हम अपनी परंपराओं और तीज-त्योहारों से कटते जा रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आधुनिकता के विरोध में नहीं हैं, बल्कि आधुनिक सोच के साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों को सहेजकर आगे बढ़ने की पक्षधर हैं।
कौथिग में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों—नरेंद्र सिंह नेगी, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, पवनदीप राजन, ललित मोहन जोशी, बी.के. सामंत, योगेश भट्ट, गोविंद दिगारी, खुशी जोशी, इंदर आर्या एवं रघुवीर रावत सहित अनेक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों और लोकनृत्यों की मधुर लय पर पूरा पंडाल झूम उठा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तरायणी कौथिग केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, लोककला और लोकजीवन के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है और स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर प्राप्त होता है।
कौथिग में पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पहाड़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी ने भी लोगों को खासा आकर्षित किया। बच्चों के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, वहीं महिलाओं के लिए आत्म-सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रस्तावित किए गए।

समापन समारोह बेहद भावुक और उत्साहपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री धामी ने अपने समापन सम्बोधन में कहा कि “देवभूमि की संस्कृति हमारी सबसे बड़ी पूंजी है”। परेड ग्राउंड में उत्तराखंड के सभी जिलों का रंग-बिरंगा प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बना, बल्कि प्रेम, सहयोग और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में भी सफल रहा।
समापन समारोह के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों एवं प्रतिभाशाली व्यक्तियों महावीर लाल , सुश्री अनुश्रिया गुलाटी , मनमोहन भारद्वाज, श्रीमती शशि थपलियाल, श्रीमती पुष्पा देवी, कन्हैया सिंह , श्रीमती संजना मंडल , सुश्री अपर्णा पनेरू , श्रीमती चम्पा पांगती एवं श्रीमती राजमती देवी को सम्मानित किया गया।
समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। परेड मैदान में सजे इस सांस्कृतिक महोत्सव ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर रखना ही उत्तराखंड की असली ताकत है।


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