निरंकारी मिशन के सेवादारों ने टपकेश्वर मन्दिर के तमसा नदी के तट पर चलाया सफाई अभियान

देहरादून।  सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के अदेशानुशार निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत के चौथा चरण के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन परियोजना का सफल आयोजन किया गया। जिसमें टपकेश्वर  मन्दिर के तमसा नदी में सफाई अभियान चलाया गया। इस सफाई अभियान मे लगभग 1200 सेवादल के भाई बहनो और साधसंगत ने करीब 600 कुंतल कूड़ा करकट एकत्र किया । मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह और सेवादल के क्षेत्रिये संचालक दिलवार सिंह पंवार ने इस आयोजन में सुरक्षा के हर वैधानिक मापदण्ड का उचित रूप से पालन कियाइस स्वच्छता कार्यक्रम में देहरादून, डोईवाला, बालावाला विकासनगर, सेलाकुई, ब्रांचों के सेवादारों ने प्रतिभाग किया।

सत्संग में यह आह्वान किया गया कि प्रत्येक श्रद्धालु तन-मन-धन को निराकार की देन मानते हुए निष्कपट भाव से सेवा में जुड़े। जब सेवा स्वार्थरहित होती है, तभी वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। अंत में यही कामना की गई कि बाबा जी की शिक्षाएँ प्रत्येक हृदय में जीवित रहें और हेल्थ सिटी जैसे प्रकल्प मानवता की भलाई के नए आयाम स्थापित करें।

संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान का शुभारम्भ सेवादल के प्रार्थना गीत से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर देशभर में प्रसारित दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा, अनुशासन एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई, जो आयोजन की सुव्यवस्थित एवं संस्कारित कार्यशैली को दर्शाता है। इसी अवसर पर खुले प्रांगण में सत्संग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

उल्लेखनीय है कि संत निरंकारी मिशन समय-समय पर समाजोपयोगी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विविध परियोजनाओं में सक्रिय योगदान देता रहा है। ‘वननेस वन’ अभियान के माध्यम से वृक्षारोपण और ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे ये प्रयास मानवता और प्रकृति के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की एक सशक्त एवं प्रेरक पहल हैं।

निःसंदेह, ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ का यह संदेश केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है, जो जल की धाराओं में निर्मलता स्थापित करने के साथ ही मन की गहराइयों में चेतना को आलोकित करता है। यही ऊर्जा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित, सुरक्षित और शाश्वत भविष्य की आधारशिला बनाती है।

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