जब लालच ने ली इंसानियत की परीक्षा…

दो मित्र एक जंगल से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें एक साधु मिला। उसने उन्हें आगाह किया कि जंगल में एक पुराना खंडहर है, उसमें मत जाना क्योंकि वहां एक राक्षस है जो लोगों को खा जाता है। दोनों बहुत हंसे और उसकी सलाह को अनसुना करके आगे बढ़ गए। अंदर आकर उन्होंने खंडहर देखा तो वहां एक पेड़ से बंधा हुआ ऊंट दिखाई दिया। उसकी पीठ पर खजाना लदा था।

दोनों ऊंट को खोलकर अपने साथ ले चले। रास्ते में एक स्थान पर वे विश्राम के लिए रुके और भोजन करने का विचार बनाया। खाना लग गया। तभी एक मित्र लघुशंका के बहाने वापस खंडहर में आया और एक डाकू के पास पड़ी पिस्तौल उठाकर अपने कपड़ों में छिपा ली।

उधर, दूसरे मित्र ने भी अवसर पाकर पहले से खाने में जहर मिला दिया ताकि सारा खजाना वह अकेले ही हड़प सके। जब पहला मित्र लोटा तो उसने पूरा खजाना कब्जाने के चक्कर में अपने मित्र को गोली मार दी। उसका वही प्राणांत हो गया। इसके बाद वह खाना खाने बैठ गया। विष मिले भोजन ने उसकी भी जान ले ली। इस प्रकार लालच रूपी राक्षस ने दोनों मित्रों के प्राण ले लिए।

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